अमेरिका ने फिर किया एयर स्ट्राइक, ईरान के सैन्य ढांचे को भारी नुकसान

Knews Desk– अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेना ने लगातार 11वीं रात भी ईरान के सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि इस बार अभियान के दौरान एयरक्राफ्ट हैंगर, ड्रोन स्टोरेज साइट, मिसाइल भंडारण केंद्र, सैन्य लॉजिस्टिक्स सुविधाओं और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेना का दावा है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

CENTCOM के मुताबिक, हमले बेहद सटीक तरीके से किए गए ताकि ईरान के सैन्य ढांचे को अधिकतम नुकसान पहुंचाया जा सके। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि हाल के महीनों में ईरान समर्थित समूहों और ईरानी सैन्य गतिविधियों के कारण पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ा है। इसी वजह से अमेरिका ने अपने अभियान को और तेज करते हुए महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की है।अमेरिका का आरोप है कि ईरान और उससे जुड़े सशस्त्र गुटों ने पिछले कुछ महीनों में होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कई वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया। इस वजह से वैश्विक समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों की चिंता बढ़ी। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि उसकी सैन्य कार्रवाई का मकसद अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों को सुरक्षित रखना और समुद्री व्यापार में किसी तरह की बाधा को रोकना है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस ताजा हमले में ईरान के उन ठिकानों को प्राथमिकता से निशाना बनाया गया, जहां ड्रोन और मिसाइलों का भंडारण किया जाता था। इसके अलावा एयरक्राफ्ट हैंगर और सैन्य उपकरणों की मरम्मत व रखरखाव से जुड़े केंद्रों पर भी बमबारी की गई। हालांकि, इन हमलों में हुए नुकसान और हताहतों की संख्या को लेकर ईरान की ओर से आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।ईरान ने पहले भी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। तेहरान का कहना है कि अगर उसके हितों पर हमला जारी रहा तो वह इसका जवाब देगा। दूसरी ओर अमेरिका ने साफ किया है कि यदि क्षेत्र में उसके सैनिकों, सैन्य ठिकानों या सहयोगी देशों पर किसी तरह का हमला हुआ तो जवाबी कार्रवाई और तेज की जाएगी।

अमेरिका और ईरान के बीच जारी इस सैन्य टकराव का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी देखने को मिल रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है।विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच लगातार हो रही सैन्य कार्रवाई से पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ने का खतरा है। यदि तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो इसका असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है, क्योंकि दोनों देशों के बीच बढ़ता टकराव किसी बड़े क्षेत्रीय संकट का रूप ले सकता है।

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