1930 में कनाडा से शुरू हुआ था राष्ट्रमंडल खेलों का सफर, पहले संस्करण में भारत शामिल नहीं हुआ था। 1934 में डेब्यू करते हुए भारत ने जीता था अपना पहला पदक।
Knews Desk- कॉमनवेल्थ गेम्स दुनिया के बड़े बहु-खेल आयोजनों में से एक है, जहां हर चार साल में राष्ट्रमंडल देशों के खिलाड़ी अलग-अलग खेलों में अपनी प्रतिभा दिखाते हैं। इन खेलों का इतिहास करीब 96 साल पुराना है और इसकी शुरुआत ब्रिटिश एम्पायर गेम्स के नाम से हुई थी।
कॉमनवेल्थ गेम्स की नींव साल 1911 में आयोजित इंटर-एम्पायर चैंपियनशिप से जुड़ी मानी जाती है। यह प्रतियोगिता लंदन में किंग जॉर्ज पंचम के राज्याभिषेक समारोह के दौरान आयोजित की गई थी। हालांकि, इसे कॉमनवेल्थ गेम्स का आधिकारिक रूप नहीं दिया गया था।
इसके बाद कनाडा के खेल पत्रकार मेल्विल मार्क्स रॉबिन्सन ने 1928 के एम्स्टर्डम ओलंपिक में हिस्सा लेने के बाद ऐसे खेल आयोजन का विचार रखा, जिसमें ब्रिटिश साम्राज्य से जुड़े देशों के खिलाड़ी एक मंच पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।
1930 में हुआ पहला आयोजन
आखिरकार 16 से 23 अगस्त 1930 के बीच कनाडा के हैमिल्टन शहर में पहला ब्रिटिश एम्पायर गेम्स आयोजित किया गया। इसमें 11 देशों के लगभग 400 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। उस समय इसमें वही देश शामिल थे जो ब्रिटेन के उपनिवेश थे या कभी उसके अधीन रह चुके थे।
पहले संस्करण में 8 खेलों के 59 मुकाबले आयोजित किए गए थे। शुरुआत में केवल व्यक्तिगत स्पर्धाओं को शामिल किया गया था। महिलाओं के लिए सिर्फ तैराकी प्रतियोगिता रखी गई थी।
खिलाड़ियों के ठहरने के लिए हैमिल्टन के सिविक स्टेडियम के पास स्थित प्रिंस ऑफ वेल्स स्कूल को अस्थायी खेल गांव में बदल दिया गया था। यहीं से हर चार साल में इस खेल आयोजन की परंपरा शुरू हुई।
द्वितीय विश्व युद्ध से रुका आयोजन
द्वितीय विश्व युद्ध के कारण 1942 और 1946 में कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन नहीं हो पाया। बाद में साल 1978 में इन खेलों को आधिकारिक तौर पर ‘कॉमनवेल्थ गेम्स’ के नाम से पहचान मिली।
भारत की बात करें तो देश ने पहली बार 1934 में इन खेलों में भाग लिया। अपने डेब्यू में ही भारत ने एक पदक जीतकर इतिहास रचा था। पहलवान राशिद अनवर ने 74 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कुश्ती में कांस्य पदक हासिल कर कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए पहला मेडल जीता था।
इसके बाद साल 1958 में महान धावक मिल्खा सिंह ने 440 यार्ड दौड़ में स्वर्ण पदक जीतकर कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए पहला गोल्ड मेडल हासिल किया।
भारतीय महिलाओं का भी रहा अहम योगदान
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय महिला खिलाड़ियों की शुरुआत साल 1958 में हुई थी। ट्रैक एंड फील्ड एथलीट स्टेफनी डिसूजा और एलिजाबेथ डेवनपोर्ट इस मंच पर पहुंचने वाली शुरुआती भारतीय महिला खिलाड़ी थीं।
वहीं, साल 1978 में अमी घिया और कंवल सिंह ने बैडमिंटन में पदक जीतकर कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ियों का गौरव हासिल किया।
कई बार भारत ने किया बहिष्कार
भारत ने राजनीतिक कारणों से भी कुछ मौकों पर इन खेलों में हिस्सा नहीं लिया। साल 1962 में चीन के साथ युद्ध के चलते भारत कॉमनवेल्थ गेम्स से दूर रहा। वहीं, 1986 में दक्षिण अफ्रीका की रंगभेद नीति के विरोध में भारत ने कई अन्य देशों के साथ मिलकर खेलों का बहिष्कार किया था।
आज कॉमनवेल्थ गेम्स खिलाड़ियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने का बड़ा मंच बन चुका है। कई खिलाड़ियों ने यहां शानदार प्रदर्शन करने के बाद ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप जैसी प्रतियोगिताओं में भी सफलता हासिल की है।