न्यायपालिका की छवि खराब करने वाले बेबुनियाद आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- सोशल मीडिया के दौर में ऐसे दावों के गंभीर परिणाम हो सकते हैं
Knews Desk- सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ बिना किसी ठोस सबूत भ्रष्टाचार के आरोप लगाने को लेकर कड़ी टिप्पणी की है। यूट्यूबर गुलशन पाहुजा की याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसे निराधार आरोप किसी जज के पूरे करियर को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने कहा कि सोशल मीडिया के समय में किसी भी व्यक्ति द्वारा लगाए गए आरोप तेजी से फैलते हैं और उनका असर काफी दूर तक जाता है। अदालत ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाने से पहले पर्याप्त प्रमाण होना जरूरी है।
‘न्यायिक अधिकारियों की छवि को नुकसान पहुंचता है’
सुप्रीम कोर्ट ने गुलशन पाहुजा से कहा कि न्यायिक अधिकारियों पर भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोप लगाना आसान है, लेकिन ऐसे आरोपों के पीछे मजबूत आधार और सबूत होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि बिना प्रमाण लगाए गए आरोप न सिर्फ संबंधित अधिकारी की प्रतिष्ठा को प्रभावित करते हैं, बल्कि उनके वर्षों के करियर पर भी असर डाल सकते हैं।
पीठ ने यह भी कहा कि न्यायिक अधिकारियों को कई बार इस तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि किसी के खिलाफ मनमाने आरोप लगाए जाएं।
पाहुजा ने बताया अपना उद्देश्य, कोर्ट ने दी जिम्मेदारी की सलाह
सुनवाई के दौरान गुलशन पाहुजा ने अदालत को बताया कि उनका मकसद केवल न्यायिक व्यवस्था में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना है और उन्होंने किसी भी जज को व्यक्तिगत रूप से निशाना नहीं बनाया।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायिक व्यवस्था में सुधार की बात उठाना अलग विषय है, लेकिन आरोप लगाने का तरीका जिम्मेदार और कानूनी होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि बिना सबूत लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनाई थी छह महीने की सजा
गौरतलब है कि इसी साल मई में दिल्ली हाई कोर्ट ने गुलशन पाहुजा को आपराधिक अवमानना का दोषी ठहराते हुए छह महीने की जेल की सजा सुनाई थी। इसके अलावा उन पर 2 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।
हाई कोर्ट का कहना था कि पाहुजा ने अपने यूट्यूब वीडियो और अदालत में बहस के दौरान न्यायपालिका के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां की थीं। वहीं, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान पाहुजा ने सरेंडर कर दिया, जिसके बाद अदालत ने कहा कि मौजूदा स्थिति में उनकी याचिका पर आगे सुनवाई का कोई औचित्य नहीं रह गया है।