सोनम वांगचुक के समर्थन में अमेरिकी एक्टिविस्ट की आवाज, NEET पेपर लीक मुद्दे पर उठाए सवाल

KNEWS DESK- NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को देश के साथ-साथ विदेशों में भी समर्थन मिल रहा है। अमेरिका के एक एक्टिविस्ट ने भी इस मामले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताई है।

सोनम वांगचुक लंबे समय से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे। उनका आंदोलन परीक्षा व्यवस्था में सुधार, कथित पेपर लीक मामलों में जवाबदेही और छात्रों के हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, वांगचुक ने 28 जून से यह अनशन शुरू किया था और उनकी मांगों में शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता तथा जिम्मेदारी तय करने की बात शामिल है। वांगचुक के आंदोलन को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) से जुड़े प्रदर्शन का समर्थन मिला। इस आंदोलन में परीक्षा प्रणाली को लेकर सवाल उठाए गए और सरकार से जवाबदेही की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

अमेरिकी एक्टिविस्ट ने सोशल मीडिया के जरिए इस मुद्दे पर अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में निष्पक्षता और छात्रों के अधिकारों की रक्षा जरूरी है। उन्होंने वांगचुक के शांतिपूर्ण आंदोलन और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर समर्थन जताया। इस बीच, वांगचुक की तबीयत को लेकर भी चिंता बढ़ गई थी। लगातार भूख हड़ताल के कारण उनका वजन कम हुआ और स्वास्थ्य पर असर पड़ा। दिल्ली हाई कोर्ट ने भी उनकी सेहत को लेकर चिंता जताते हुए प्रशासन को नियमित स्वास्थ्य जांच और निगरानी के निर्देश दिए थे।

बाद में स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस के अनुसार, यह कदम मेडिकल सलाह और स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया। वहीं, आंदोलन से जुड़े लोगों ने इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए और इसे विरोध की आवाज दबाने की कोशिश बताया। सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने भी अस्पताल में भर्ती किए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य की निगरानी जरूरी है, लेकिन इलाज से जुड़े फैसलों में परिवार और उनके डॉक्टरों की सहमति को भी महत्व दिया जाना चाहिए। वहीं, आंदोलन से जुड़े नेताओं ने 20 जुलाई को संसद तक मार्च का आह्वान किया है। उनका कहना है कि यह प्रदर्शन छात्रों की आवाज और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर है।

सोनम वांगचुक देश में शिक्षा सुधार और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर काम करने के लिए जाने जाते हैं। उनकी भूख हड़ताल ने एक बार फिर परीक्षा व्यवस्था, छात्रों की समस्याओं और सरकार की जवाबदेही को लेकर बहस तेज कर दी है। फिलहाल इस पूरे मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी लगातार सामने आ रही हैं। जहां विपक्ष सरकार से संवाद और कार्रवाई की मांग कर रहा है, वहीं प्रशासन इसे स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था से जुड़ा कदम बता रहा है। अब सभी की नजरें आगे की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों पर बनी हुई हैं।

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