Knews Desk- वियतनाम के फू क्वोक द्वीप के पास हुए दर्दनाक नाव हादसे ने एक खुशियों भरी यात्रा को मातम में बदल दिया। इस हादसे में जान गंवाने वाले सभी 15 भारतीय नागरिक मोबाइल कंपनी LAVA से जुड़े हुए थे। कंपनी ने अपने आधिकारिक बयान में बताया कि मृतकों में उसके 14 चैनल पार्टनर (डीलर और डिस्ट्रीब्यूटर) और एक कर्मचारी शामिल था।
जानकारी के मुताबिक, यह यात्रा कंपनी की ओर से बेहतर प्रदर्शन करने वाले डीलरों और डिस्ट्रीब्यूटर्स को दी गई इंसेंटिव ट्रिप थी। लेकिन जिस सफर को यादगार बनाने के लिए लोग विदेश गए थे, वही उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन गया। भारतीय दूतावास की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, हादसे में मारे गए लोगों में 10 लोग तमिलनाडु, 3 आंध्र प्रदेश और 2 केरल के रहने वाले थे। मृतकों की पहचान तमिलनाडु के जे. सेंथिल कुमार, ए. मुरुगा प्रभु, एस. श्रीधर, शेख अब्दुल्ला अब्दुल मजीद, एन. बालाजी, सी. बी. विनय कुमार, एस. रविशंकर, एस. संतोष कुमार, के. बाबू और एस. अलगुराजन के रूप में हुई है।
वहीं आंध्र प्रदेश के मुडियम श्रीधर, मछलीपट्टनम की गेल्ली जयश्री और श्री सत्य साईं जिले के एन रवि तेजा भी हादसे में मारे गए। गेल्ली जयश्री के पति भी नाव में मौजूद थे, जो हादसे के बाद गंभीर रूप से घायल हैं और अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। केरल के कोट्टाराक्कारा निवासी ए. सी. थॉमस और उनकी पत्नी लोवेनी की भी इस हादसे में मौत हो गई। हादसे के बाद LAVA मोबाइल्स ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि कंपनी वियतनाम में भारतीय दूतावास और स्थानीय प्रशासन के लगातार संपर्क में है। कंपनी ने बताया कि वह मृतकों के शवों को जल्द से जल्द भारत वापस लाने की प्रक्रिया में जुटी है। साथ ही प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
हादसे में बचे तमिलनाडु निवासी मुरुगराज ने बताया कि नाव समुद्र में करीब 2 किलोमीटर अंदर पहुंच चुकी थी, तभी अचानक एक बड़ी लहर आई और नाव एक तरफ झुक गई। यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई और कई लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर गए। नाव पलटने के दौरान कुछ लोग खिड़की से बाहर निकलकर रेलिंग पकड़ने में सफल रहे, लेकिन कई यात्री समुद्र में समा गए। वियतनाम के फू क्वोक द्वीप के पास हुई इस दुर्घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। जिस यात्रा को सफलता का जश्न और खुशियों का पल होना था, वह अब कई परिवारों के लिए कभी न भर पाने वाला दुख बन गई है।