120 मिनट में हाथों से लिखे 120 पेज, रांची की डॉ. मेघा रानी ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड

Knews Desk– डिजिटल दौर में जहां लोग लिखने से ज्यादा टाइपिंग को प्राथमिकता देने लगे हैं, वहीं झारखंड की राजधानी रांची की हिंदी लेखिका डॉ. मेघा रानी ने अपनी लेखनी से ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने उन्हें विश्व स्तर पर पहचान दिला दी। डॉ. मेघा रानी ने महज 120 मिनट में लगातार 120 पृष्ठ हाथों से लिखकर नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। इस शानदार उपलब्धि के लिए उन्हें 2 जुलाई 2026 को ‘बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ की ओर से आधिकारिक प्रमाणपत्र प्रदान किया गया। इसके साथ ही वह दुनिया की सबसे तेज गति से हिंदी में हस्तलिखित लेखन करने वाली लेखिका बन गई हैं।इस विश्व रिकॉर्ड के लिए डॉ. मेघा रानी ने “अपन झारखंड” विषय का चयन किया। उन्होंने लगातार दो घंटे तक बिना रुके झारखंड की संस्कृति, इतिहास, परंपराओं, विरासत और राज्य के महान नायकों के योगदान को अपने शब्दों में कागज पर उतारा। उन्होंने बताया कि यह केवल तेज लिखने की चुनौती नहीं थी, बल्कि अपनी मातृभूमि और मातृभाषा के प्रति सम्मान व्यक्त करने का भी एक प्रयास था। 120 मिनट तक लगातार लिखते हुए उन्होंने 120 पृष्ठ पूरे किए और विश्व रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज करा लिया।

अपनी इस उपलब्धि पर डॉ. मेघा रानी ने इसका श्रेय अपने माता-पिता, पति और पूरे परिवार को दिया। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी पहचान और संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आज के डिजिटल युग में लोग मोबाइल और कंप्यूटर पर टाइपिंग के आदी हो गए हैं, जिससे हस्तलेखन की आदत धीरे-धीरे कम होती जा रही है। उनका मानना है कि लिखने की कला कभी खत्म नहीं होनी चाहिए और नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा में लिखने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।डॉ. मेघा रानी ने बताया कि उनके लेखन की शुरुआत बचपन में ही हो गई थी। उनके पिता मनोहर कुमार रोजाना उन्हें कॉपी में कम से कम दो पेज हिंदी लिखने के लिए कहते थे। उस समय यह आदत उन्हें कठिन लगती थी और कई बार पिता की डांट भी सुननी पड़ती थी, लेकिन वही अनुशासन आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया। आज उसी अभ्यास ने उन्हें विश्व रिकॉर्ड तक पहुंचा दिया। उन्होंने भावुक होकर कहा कि बचपन में मिली सीख और अनुशासन ही उनकी सफलता की असली नींव है।

उन्होंने यह भी बताया कि 2 जुलाई का दिन उनके जीवन का सबसे खास दिन बन गया। एक ओर उन्हें ‘बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ का प्रमाणपत्र मिला, वहीं दूसरी ओर उसी दिन उनकी मां पूनम का जन्मदिन भी था। ऐसे में एक ही दिन दो बड़ी खुशियां मिलने से वह बेहद भावुक हो गईं। उनके अनुसार यह उपलब्धि केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि पूरे झारखंड और हिंदी भाषा के लिए गर्व का विषय है।डॉ. मेघा रानी पिछले कई वर्षों से नारी विमर्श, सामाजिक सरोकार, हिंदी साहित्य और सामाजिक जागरूकता जैसे विषयों पर लगातार लेखन कर रही हैं। उनका कहना है कि भाषा और लेखन समाज को जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने युवाओं, खासकर बेटियों से अपील की कि वे डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल जरूर करें, लेकिन हस्तलेखन की आदत कभी न छोड़ें। उनका मानना है कि हाथ से लिखने से न केवल भाषा पर पकड़ मजबूत होती है, बल्कि सोचने और अभिव्यक्ति की क्षमता भी विकसित होती है।

डॉ. मेघा रानी की यह उपलब्धि केवल एक विश्व रिकॉर्ड नहीं, बल्कि हिंदी भाषा, हस्तलेखन और भारतीय संस्कृति के प्रति समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि तकनीक के दौर में भी अगर लगन, अनुशासन और मातृभाषा के प्रति प्रेम हो, तो दुनिया में नई पहचान बनाई जा सकती है। उनकी सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है कि अभ्यास, समर्पण और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

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