उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, देश के तमाम राज्यों में एस आई आर की प्रक्रिया पहले ही संपन्न हो चुकी है. वहीं, वर्तमान समय में उत्तराखंड राज्य में एस आई आर की प्रक्रिया गतिमान है. उत्तराखंड में 8 जून 2026 से एस आई आर के पहले चरण की प्रक्रिया शुरू हुई थी, जो 7 जुलाई 2026 को संपन्न होगी. लेकिन उससे पहले ही प्रदेश में एस आई आर के पहले चरण की कार्रवाई लगभग पूरी हो चुकी है. खास बात यह है कि वर्तमान समय में एस आई आर के दौरान मतदाताओं का जो आंकड़ा निकाल कर सामने आया है वो काफी अधिक चौंकाने वाला है. क्योंकि इसी साल जनवरी महीने में प्रदेश में 84.55 लाख मतदाता थे जो अब घटकर 71.16 लाख हो गए हैं. दरअसल, उत्तराखंड राज्य में जब प्री- एसआईएस चल रहा था, उसे दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से प्रदेश में मतदाताओं की संख्या 84,55,994 बताई गई थी. वही, एस आई आर के अंतिम चरण के दौरान मतदाताओं की संख्या 79,60,762 बताया गया है. जिसमें से 8,41,020 मतदाताओं को एएसडी की श्रेणी में रखा गया है.ऐसे में वर्तमान समय में कुल 71,16,650 मतदाता ऐसे हैं, जिनके गणना फार्म को डिजिटलाइज्ड किया गया है. हालांकि, एएसडी श्रेणी में रखें गए 8,41,020 मतदाताओं के वजहों को तो निर्वाचन आयोग ने बता दिया है.लेकिन 30 जनवरी 2026 को जारी मतदाताओं के आंकड़ों से एस आई आर शुरू होने से पहले जारी मतदाताओं के आंकड़ों की तुलना करें तो करीब 4,95,232 मतदाताओं के नाम एस आई आर शुरू होने से पहले ही काटे जा चुके हैं.ऐसे में मतदाता सूची में इस बड़ी गिरावट पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं. विपक्ष का आरोप है, कि भाजपा SIR के जरिए बंगाल चुनाव की तरह उत्तराखंड में भी चुनावी लाभ लेने की कोशिश कर रही है.जिस पर सत्ता पक्ष की भी प्रतिक्रिया सामने आ रही है.
उत्तराखंड राज्य में 8 जून से एस आई आर की प्रक्रिया शुरू हुई थी, जिसके पहले चरण की प्रक्रिया 7 जुलाई 2026 को संपन्न हो रही है. उससे पहले ही करीब 8 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम काटे जाने हैं,जबकि प्री एस आई आर के दौरान भी लगभग पांच लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जा चुके हैं.कुल मिलाकर साल 2022 में हुए विधानसभा चुनाव से तुलना करें तो आगामी 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के दौरान मतदाताओं की संख्या में एक बड़ा अंतर देखने को मिलेगा.कुल मिलाकर मतदाता सूची से 8.41 मतदाताओं के नाम को डिलीट करने की सम्भावना है. हालांकि,अभी कितने नाम को डिलीट किया जाएगा,यह संख्या अभी तय करना उचित नहीं होगा.क्योंकि 14 जुलाई को ड्राफ्ट के प्रकाशन के बाद लोगों को दावे और आपत्तियों के लिए एक माह का समय दिया जाएगा.उसके बाद जो संख्या बढ़ेगी उसके आधार पर मतदाताओं के नाम का विलोपन किया जाएगा.जिसकी जानकारी सभी राजनीतिक दलों को भी उपलब्ध करा दी गई है.लेकिन उससे पहले ही राजनीतिक दलों में चिंता का विषय बना हुआ है.साथ ही आरोप प्रत्यारोप का दौर भी अपनी चरम सीमा पर है.
प्रदेशभर में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान यानी SIR के तहत मतदाता सूची से 8 लाख से ज्यादा नाम हटना अपने आप में चिंता का विषय है.और यही कारण है कि इस विषय को लेकर सियासत भी गरमा गई है.जहां एक ओर विपक्ष इसे चुनावी साजिश बता रहा है,वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि SIR मतदाता सूची के शुद्धिकरण की संवैधानिक प्रक्रिया है. निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है. कि मृत,स्थानांतरित और दोहरी प्रविष्टि वाले नाम नियमानुसार हटाए गए हैं. सत्ता पक्ष का तर्क है कि शुद्ध मतदाता सूची से लोकतंत्र मजबूत होगा और फर्जी मतदान पर रोक लगेगी लेकिन विपक्ष लगातार हमलावर है.और भाजपा पर चुनावी लाभ लेने का आरोप लगा रहा है. SIR के बाद प्रदेश में मतदाताओं की संख्या 84.55 लाख से घटकर 71.16 लाख रह गई है.अब देखना होगा,कि विपक्ष के आरोपों और आयोग के स्पष्टीकरण के बीच जनता इस पूरे मामले को किस प्रकार देखती है।