Knews Desk- लखनऊ के लोकबंधु राजनारायण अस्पताल में पैदा होने के बाद फर्श पर गिरने से नवजात की मौत के मामले में दो संविदा स्टाफ नर्स पर दोष मढ़ा गया है। दोनों स्टाफ नर्स को नौकरी से हटाने की तैयारी है। जबकि, एक वरिष्ठ महिला रोग विशेषज्ञ को नोटिस देकर जवाब मांगा है।
स्टाफ ने ऑनकाल महिला रोग विशेषज्ञ को फोन कर बुलाया। डॉक्टर नहीं आईं। न ही वार्ड में कोई नियमित स्टाफ नर्स की तैनाती थी। इन दोनों अहम बिन्दुओं पर जांच कमेटी ने पर्दा डाल दिया है। इस मामले में निदेशक का कहना है कि हम तो कार्रवाई की सिफारिश कर सकते हैं, बाकी काम उच्च अधिकारी का है।
जांच पर उठे सवाल
लोकबंधु अस्पताल में प्रसव के बाद शिशु की मौत के मामले की जांच सवालों के घेरे में है। अस्पताल में 6 गायनी यानी स्त्री-प्रसूति रोग विशेषज्ञ हैं। सात इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर हैं। करीब 20 नर्सिंग और ओटी स्टाफ है। इतनी लंबी-चौड़ी डॉक्टर-नर्स की फौज होने के बावजूद मरीजों को समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है।
अस्पताल में रविवार को घटना के दौरान क्या कोई नियमित स्टाफ नर्स तैनात था या नहीं? यदि तैनात था तो उसकी जिम्मेदारी क्यों तय नहीं की गई? वहीं नियमित डॉक्टर कहां थी।
आरोप हैं कि फोन पर ऑनकाल डॉक्टर को स्टाफ ने सूचना दी। उसके बाद क्या ऑनकाल डॉक्टर ड्यूटी पर आईं? डॉक्टर की गैर मौजूदगी में किसने इलाज किया? इन बिन्दुओं के आधार पर न तो किसी नियमित स्टाफ पर कार्रवाई की गई न ही डॉक्टर पर। सिर्फ नोटिस देकर मामले को दबाने की कोशिश की गई है।
डीजी को सौंपी गई रिपोर्ट
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने 24 घंटे में शिशु की मौत के मामले की जांच पूरी करने के आदेश दिए थे। लोकबंधु अस्पताल प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक डॉ. पवन कुमार अरूण को दो पेज की रिपोर्ट सौंपी। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. पवन ने बताया कि रिपोर्ट के आधार पर दो स्टाफ नर्स को नौकरी से हटा दिया गया है।
वहीं, ऑनकाल ड्यूटी पर तैनात डॉ. चंद्रकांता को नोटिस देकर जवाब-तलब किया गया है। तीन बिन्दुओं पर डॉ. चंद्रकांता से जवाब मांगा गया है। इसमें डॉक्टर की मौजूदगी के बारे में भी जानकारी तलब की गई है।
सोमवार सुबह हुई थी दिल दहला देने वाली घटना
आशियाना स्थित सीता विहार कालोनी निवासी कीर्ति पाल को रविवार शाम प्रसव पीड़ा के बाद लोकबंधु में भर्ती कराया गया था। पति शुभम ने बताया कि सोमवार की सुबह लेबर रूम में प्रसव हुआ था। जहां शिशु फर्श पर गिर गया था। सिर पर गहरी चोट से शिशु की तबीयत गंभीर हो गई थी।
डॉक्टर-कर्मचारियों की हीलाहवाली की कीमत शिशु को जान गंवाकर चुकानी पड़ी थी। परिवारीजनों की जिद पर नवजात का पोस्टमार्टम कराया गया था। जिसमें सिर में चोट लगने की पुष्टि हुई।