Knews Desk– ऑस्ट्रेलिया अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और अनोखे पर्यटन स्थलों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। इन्हीं में से एक है लेक हिलियर (Lake Hillier), जिसे दुनिया की सबसे रहस्यमयी झीलों में गिना जाता है। यह झील अपने चमकीले गुलाबी रंग की वजह से लोगों को हैरान कर देती है। चारों तरफ नीले समुद्र के बीच स्थित यह झील किसी पेंटिंग जैसी दिखाई देती है। खास बात यह है कि इसका पानी पूरे साल गुलाबी ही रहता है। न बारिश, न मौसम और न ही तापमान में बदलाव इसके रंग को बदल पाते हैं। यही वजह है कि वर्षों तक यह झील वैज्ञानिकों के लिए भी एक रहस्य बनी रही।हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान भी इस अनोखी झील की चर्चा फिर से तेज हो गई। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के मिडिल आइलैंड पर स्थित करीब 600 मीटर लंबी यह झील हर साल हजारों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। ऊपर से देखने पर यह नीले समुद्र के बीच गुलाबी रंग के एक बड़े धब्बे की तरह दिखाई देती है, जो इसकी खूबसूरती को और भी खास बना देता है।
इस झील की खोज 1802 में ब्रिटिश खोजकर्ता मैथ्यू फ्लिंडर्स ने की थी। उन्होंने इसका नाम अपने अभियान दल के सदस्य विलियम हिलियर के सम्मान में लेक हिलियर रखा। झील के चारों ओर सफेद रेत, घने यूकेलिप्टस और पेपरबार्क के जंगल हैं, जो इसके प्राकृतिक सौंदर्य को और भी आकर्षक बनाते हैं।सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस झील का पानी गुलाबी क्यों दिखाई देता है? लंबे समय तक वैज्ञानिक इसका सही कारण नहीं समझ पाए थे। बाद में कई शोधों में पता चला कि इसके पीछे किसी रासायनिक रंग या प्रदूषण का नहीं, बल्कि प्रकृति के अद्भुत विज्ञान का हाथ है।
वैज्ञानिकों के अनुसार लेक हिलियर का पानी समुद्र के पानी की तुलना में करीब 10 गुना अधिक नमकीन है। इस अत्यधिक नमक वाले वातावरण में कुछ विशेष प्रकार के सूक्ष्मजीव और शैवाल (Algae) पनपते हैं। इनमें प्रमुख रूप से ड्यूनालिएला सलीना (Dunaliella salina) नामक शैवाल शामिल है, जो तेज धूप और अधिक नमक से खुद को बचाने के लिए बीटा-कैरोटीन (Beta-Carotene) नाम का प्राकृतिक पिगमेंट बनाता है। यही पिगमेंट झील के पानी को गुलाबी रंग देता है।बीटा-कैरोटीन वही प्राकृतिक तत्व है जो गाजर, शकरकंद और कई फलों-सब्जियों को नारंगी या लाल रंग प्रदान करता है। लेक हिलियर में मौजूद शैवाल इसी पिगमेंट का उत्पादन बड़ी मात्रा में करते हैं, जिससे पूरी झील का पानी गुलाबी दिखाई देता है।
इसके अलावा वैज्ञानिकों का मानना है कि इस झील में पाए जाने वाले हैलोफिलिक बैक्टीरिया (Halophilic Bacteria) भी इसके रंग को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये बैक्टीरिया केवल अत्यधिक नमकीन पानी में जीवित रहते हैं और अपने भीतर मौजूद लाल और गुलाबी रंग के पिगमेंट्स के कारण पानी के रंग को और गहरा बना देते हैं। शैवाल और इन बैक्टीरिया का संयुक्त प्रभाव ही लेक हिलियर को उसका अनोखा गुलाबी रंग देता है।दिलचस्प बात यह है कि यदि इस झील का पानी किसी बोतल में भर लिया जाए, तब भी उसका गुलाबी रंग काफी हद तक बना रहता है। हालांकि समय के साथ सूक्ष्मजीवों की संख्या कम होने पर रंग हल्का पड़ सकता है, लेकिन सामान्य परिस्थितियों में यह झील पूरे साल अपनी गुलाबी पहचान बनाए रखती है।लेक हिलियर केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि प्रकृति और विज्ञान के अद्भुत मेल का शानदार उदाहरण भी है। यह हमें बताती है कि पृथ्वी पर ऐसे कई प्राकृतिक चमत्कार मौजूद हैं, जिनके पीछे बेहद रोचक वैज्ञानिक कारण छिपे होते हैं। यही वजह है कि ऑस्ट्रेलिया की यह गुलाबी झील आज भी दुनिया भर के वैज्ञानिकों, पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।