UP Politics: मंत्री रविंद्र जायसवाल के कब्रिस्तान-श्मशान बयान पर बवाल, सपा ने खोला मोर्चा

Knews Desk- उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इसी बीच प्रदेश सरकार के मंत्री रविंद्र जायसवाल के एक बयान को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। कब्रिस्तान और श्मशान को लेकर दिए गए उनके बयान पर समाजवादी पार्टी ने कड़ी आपत्ति जताई है और राज्यपाल से मंत्री को पद से हटाने की मांग की है।

दरअसल, चंदौली में एक कार्यक्रम के बाद पत्रकारों ने मंत्री रविंद्र जायसवाल से समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा चंदा चोरी के आरोपों को लेकर सवाल पूछा था। इसी दौरान जवाब देते हुए मंत्री ने अखिलेश यादव के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कब्रिस्तान और श्मशान का मुद्दा उठा दिया।

रविंद्र जायसवाल ने कहा कि जब अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे और वह विधायक थे, तब सरकार की ओर से कब्रिस्तानों की चारदीवारी के लिए फंड जारी किया गया था। उन्होंने दावा किया कि उस समय उन्होंने अखिलेश यादव से कहा था कि अगर कब्रिस्तानों के लिए धन दिया जा रहा है तो श्मशान घाटों के लिए भी फंड दिया जाना चाहिए, लेकिन श्मशान के लिए फंड जारी नहीं किया गया।

मंत्री ने आगे विपक्ष पर निशाना साधते हुए कई राजनीतिक आरोप लगाए। उनके बयान के बाद समाजवादी पार्टी ने इसे आपत्तिजनक बताते हुए विरोध शुरू कर दिया। सपा विधायक प्रभु नारायण यादव ने मंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एक मंत्री के पद पर बैठे व्यक्ति से इस तरह की भाषा की उम्मीद नहीं की जाती। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के मंत्री समाज को बांटने वाली राजनीति कर रहे हैं।

वहीं, सपा विधायक आशुतोष सिन्हा ने कहा कि चंदा चोरी जैसे मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए मंत्री ने अखिलेश यादव के खिलाफ विवादित बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मूल सवालों का जवाब देने के बजाय मुद्दों को बदलने की कोशिश कर रही है। मंत्री के बयान के विरोध में समाजवादी पार्टी के कई कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जाहिर की। कुछ जगहों पर कार्यकर्ताओं ने मंत्री के पोस्टर के साथ विरोध प्रदर्शन भी किया।

इस पूरे विवाद पर वरिष्ठ पत्रकार विजय नारायण ने कहा कि मंत्री का बयान मामले को दूसरी दिशा में ले जाने की कोशिश जैसा दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार, जिस मुद्दे पर सवाल उठ रहे हैं, उससे ध्यान हटाने के लिए राजनीतिक बहस को दूसरे विषयों की ओर मोड़ा जा रहा है। उत्तर प्रदेश में चुनावी माहौल के बीच कब्रिस्तान-श्मशान का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही इस मुद्दे के जरिए अपनी-अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

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