अमित शाह की बड़ी घोषणा: जल्द बनेगी सहकारी जीवन बीमा कंपनी

Knews Desk- केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देश में सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा है कि जल्द ही एक सहकारी जीवन बीमा कंपनी की स्थापना की जाएगी। यह पहल सहकारी मॉडल पर आधारित होगी और इसका उद्देश्य देशभर की सहकारी संस्थाओं को बीमा क्षेत्र में अधिक सक्रिय और सशक्त भूमिका देने का है।

राष्ट्रीय राजधानी में सहकारिता मंत्रालय के पांचवें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में अमित शाह ने कहा कि यह नई सहकारी जीवन बीमा कंपनी “भारत टैक्सी” मॉडल की तर्ज पर काम करेगी। उन्होंने बताया कि इसका लक्ष्य देश की 8.5 लाख से अधिक सहकारी संस्थाओं और उनके 30 करोड़ से ज्यादा सदस्यों को सीधे तौर पर लाभ पहुंचाना है। शाह ने कहा कि सहकारी क्षेत्र को केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि इसे आधुनिक आर्थिक ढांचे के साथ जोड़कर आगे बढ़ाना होगा।

अमित शाह ने अपने संबोधन में सहकारी आंदोलन के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि पहले इस क्षेत्र को अपेक्षित महत्व नहीं मिला, लेकिन वर्तमान सरकार के प्रयासों से इसमें नई ऊर्जा आई है। उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में सहकारिता मंत्रालय ने इस क्षेत्र में पारदर्शिता और पेशेवर व्यवस्था लाने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनके परिणाम अब दिखाई दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि देश में सहकारी संस्थाओं का एक विस्तृत डेटाबेस तैयार किया गया है, जिससे उनके संचालन और विस्तार में मदद मिल रही है। इसके अलावा, गुजरात के आणंद में त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है, जिसका उद्देश्य सहकारी क्षेत्र के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करना है। शाह ने कहा कि सहकारिता अब केवल डेयरी, चीनी या उर्वरक तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका विस्तार कई नए क्षेत्रों में हो रहा है।

कार्यक्रम में शाह ने यह भी बताया कि सहकारी टैक्सी सेवा ‘भारत टैक्सी’ अच्छा प्रदर्शन कर रही है और आने वाले दो वर्षों में इसे 500 शहरों तक विस्तारित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि सहकारी मॉडल आर्थिक समावेशन का एक प्रभावी माध्यम बन सकता है, जिससे छोटे किसानों, युवाओं और ग्रामीण उद्यमियों को बड़ा लाभ मिलेगा। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने सहकारी क्षेत्र की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य राज्यों के अधिकारों में हस्तक्षेप करना नहीं है, बल्कि नीतिगत स्तर पर सहकारी तंत्र को मजबूत करना है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले पांच वर्षों में किसी भी राज्य ने इस तरह की शिकायत नहीं की है कि केंद्र ने उनके अधिकार क्षेत्र में दखल दिया हो।

कार्यक्रम के दौरान कई अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं की भी शुरुआत की गई। इनमें 75,000 टन क्षमता वाले 135 गोदामों का हस्तांतरण, 85 नए गोदामों का उद्घाटन और 47 अनाज भंडारण परियोजनाओं का वर्चुअल शिलान्यास शामिल था। इसके साथ ही अमूल और एनसीसीएफ द्वारा ‘सहकार वन’ परियोजना का भूमिपूजन तथा बीज सहकारी समिति से जुड़े कई नए कार्यक्रमों की शुरुआत भी की गई।

सरकार ने 50,000 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों को ई-पैक्स में बदलने की दिशा में भी कदम उठाया है, जिससे ग्रामीण स्तर पर सहकारी संस्थाओं का डिजिटलकरण हो सके। इसके अलावा भारतीय बीज सहकारी समिति और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के बीच बीज प्रणाली को मजबूत करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए। इस कार्यक्रम में सहकारिता मंत्रालय ने 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सहकारी क्षेत्र को देश के आर्थिक विकास का एक मजबूत स्तंभ बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

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