सिर्फ एक फ्रैक्चर… बना 16 लाख का बिल, रांची में अस्पताल की लापरवाही से लड़के की गई जान

रांची में एक प्राइवेट हॉस्पिटल पर मनमानी के आरोप लगे हैं. आरोप है कि एक्सीडेंट में घायल युवक को एक फ्रैक्चर था. उसे ICU में भर्ती कराया गया. इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. परिवार से 16 लाख रुपये का बिल वसूला गया. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले की जांच के निर्देश दिये हैं.


Knews Desk- झारखंड की राजधानी रांची में अस्पताल की मनमानी का वाक्या सामने आया. एक प्राइवेट हॉस्पिटल में 18 साल के युवक की इलाज के दौरान मौत हो गई. मामले पर सियासी हंगामा शुरू हो गया. सड़क हादसे में घायल युवक को पैर के फ्रैक्चर के इलाज के लिए भर्ती कराया गया था, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. परिवार का आरोप है कि अस्पताल की लापरवाही के कारण युवक की जान गई. इलाज के नाम पर करीब 16 लाख रुपये का भारी-भरकम बिल भी थमा दिया गया. मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जांच के आदेश दिए. जिसके बाद जिला प्रशासन ने चार सदस्यीय जांच टीम बनाई गई.

मुख्यमंत्री के निर्देश पर उपायुक्त ने पूरे मामले की जांच कराने का आदेश दिया. इसके बाद सिविल सर्जन कार्यालय ने चिकित्सकीय जांच के लिए डॉ. एस. अली और डॉ. राजीव रंजन को टीम में शामिल किया. जिला प्रशासन की ओर से दो अधिकारियों को भी जांच दल में रखा गया. सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि जांच टीम ने शनिवार से अस्पताल में इलाज से जुड़े दस्तावेज, मेडिकल रिकॉर्ड, उपचार प्रक्रिया, अस्पताल प्रबंधन की भूमिका और परिजनों के आरोपों की जांच शुरू कर दी है. रिपोर्ट सीधे उपायुक्त को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी.

क्या था पूरा मामला?
बताया जा रहा है कि 18 साल का राजू कुमार रंजन सड़क दुर्घटना में घायल हो गया था. 24 मई को अस्पताल में भर्ती हुआ था. परिजनों का कहना है कि उसे पैर में फ्रैक्चर था, लेकिन इलाज के दौरान संक्रमण फैल गया. उसकी हालत बिगड़ती चली गई. इलाज के बाद अस्पताल ने करीब 18 लाख रुपये का बिल थमा दिया. इसमें 10 लाख रुपये बीमा कंपनी से अस्पताल को मिले, जबकि शेष राशि परिजनों ने जमा की. करीब ढाई लाख रुपये बकाया रहने पर अस्पताल और परिजनों के बीच विवाद भी हुआ, जिसके बाद अस्पताल परिसर में हंगामा मच गया.

अस्पताल प्रशासन ने क्या कहा?
हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने सभी आरोपों को खारिज किया है. अस्पताल का कहना है कि मरीज केवल पैर के फ्रैक्चर से पीड़ित नहीं था, बल्कि उसके सिर में गंभीर चोट, रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर और दोनों फेफड़ों में गंभीर चोटें थीं. अस्पताल के मुताबिक, डॉक्टरों ने चार दिन पहले ही मरीज की जान बचाने के लिए पैर काटने (एम्प्यूटेशन) की सलाह दी थी, लेकिन परिजनों ने इसकी अनुमति नहीं दी. अस्पताल का दावा है कि सरकारी जांच टीम को सभी मेडिकल रिकॉर्ड और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करा दिए गए हैं.

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