Knews Desk- बिहार सरकार ने राज्य के सड़क नेटवर्क और राजस्व बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए पहली बार राज्य राजमार्गों (स्टेट हाईवे) और कुछ पुलों पर टोल वसूली का रास्ता साफ कर दिया है। राज्य मंत्रिमंडल ने ‘पथ उपयोगकर्ता शुल्क नियमावली-2026’ को मंजूरी दे दी है। हालांकि, यह व्यवस्था अभी लागू नहीं हुई है, लेकिन सरकार ने टोल दरें तय कर दी हैं और जल्द ही सर्वे के आधार पर टोल प्लाजा स्थापित किए जाने की तैयारी है।
किन वाहनों पर कितना लगेगा टोल?
नई नियमावली के अनुसार टोल शुल्क वाहन की श्रेणी और तय की गई दूरी के आधार पर लिया जाएगा।
- कार, जीप और अन्य हल्के निजी वाहन: 1.25 रुपये प्रति किलोमीटर
- छोटे व्यावसायिक वाहन (पिकअप, लोडिंग टेंपो आदि): 2 रुपये प्रति किलोमीटर
- दो एक्सल वाले बस और ट्रक: 4.25 रुपये प्रति किलोमीटर
- भारी वाहन (डंपर, पोकलेन आदि): 6.65 रुपये प्रति किलोमीटर
- सात एक्सल या उससे अधिक क्षमता वाले भारी वाहन: 8.10 रुपये प्रति किलोमीटर
उदाहरण के तौर पर यदि कोई कार चालक स्टेट हाईवे पर 60 किलोमीटर की यात्रा करता है तो उसे करीब 75 रुपये टोल शुल्क देना होगा।
कितने टोल प्लाजा बन सकते हैं?
बिहार में स्टेट हाईवे का कुल नेटवर्क करीब 3,614 किलोमीटर है। यदि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की तरह लगभग हर 60 किलोमीटर पर एक टोल प्लाजा स्थापित किया जाता है, तो राज्य में करीब 62 नए टोल प्लाजा बनाए जा सकते हैं। हालांकि, अंतिम संख्या सरकार के सर्वे और परियोजना की व्यवहार्यता पर निर्भर करेगी।
किन सड़कों पर लगेगा टोल?
फिलहाल सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि किन-किन स्टेट हाईवे और पुलों पर टोल वसूला जाएगा। इसके लिए विस्तृत सर्वे कराया जाएगा, जिसमें ट्रैफिक घनत्व, सड़क की स्थिति, आर्थिक व्यवहार्यता और वाहन आवागमन का आकलन किया जाएगा। सर्वे रिपोर्ट के बाद ही टोल प्लाजा के स्थान तय किए जाएंगे। भविष्य में बनने वाले एक्सप्रेस-वे और हाई-स्पीड कॉरिडोर भी इस व्यवस्था के दायरे में आ सकते हैं।
कैसे होगी टोल की वसूली?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल होगी। टोल वसूली मुख्य रूप से फास्टैग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों से की जाएगी। जिन वाहनों पर फास्टैग नहीं होगा, उनसे सामान्य दर से अधिक शुल्क लिया जा सकता है।
इसके अलावा ओवरलोड वाहनों पर अतिरिक्त जुर्माना लगाने का भी प्रावधान रखा गया है। वहीं रोजाना एक ही मार्ग पर यात्रा करने वाले लोगों के लिए मासिक पास, रियायती योजना और बार-बार यात्रा करने वालों को विशेष छूट देने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।
आम लोगों पर क्या होगा असर?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद राज्य के हाईवे पर यात्रा करने वालों की परिवहन लागत बढ़ सकती है। खासकर वे लोग जो रोजाना स्टेट हाईवे का इस्तेमाल करते हैं या जिनकी यात्रा में स्टेट और नेशनल हाईवे दोनों शामिल हैं, उन्हें अधिक टोल शुल्क देना पड़ सकता है। इसका असर परिवहन, व्यापार और माल ढुलाई की लागत पर भी पड़ने की संभावना है।
सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?
सरकार का कहना है कि इस कदम से सड़कों के रखरखाव, नई सड़क परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए अतिरिक्त राजस्व जुटाया जा सकेगा। राज्य सरकार का मानना है कि उपयोगकर्ता शुल्क से प्राप्त राशि को सड़क निर्माण और रखरखाव में लगाया जाएगा, जिससे बेहतर परिवहन सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
कब से लागू होगी नई व्यवस्था?
फिलहाल बिहार सरकार ने केवल नियमावली को मंजूरी दी है। टोल वसूली कब से शुरू होगी, इसकी आधिकारिक तारीख अभी घोषित नहीं की गई है। पहले सर्वे पूरा होगा, फिर टोल प्लाजा के स्थान तय किए जाएंगे और उसके बाद नई व्यवस्था लागू करने की अधिसूचना जारी की जाएगी।
स्पष्ट है कि यह फैसला बिहार में सड़क परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। यदि योजना लागू होती है तो पहली बार राज्य के स्टेट हाईवे पर भी राष्ट्रीय राजमार्गों की तर्ज पर टोल टैक्स वसूला जाएगा।