India-Japan Summit 2026: 120 से अधिक समझौते, निवेश और टेक्नोलॉजी पर जोर

Knews Desk- 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नई गति मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की बैठक में कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), फार्मा, डिफेंस, सेमीकंडक्टर और ऊर्जा सुरक्षा प्रमुख रहे।

शिखर वार्ता के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों नेताओं ने इसे भारत-जापान संबंधों में “नया अध्याय” बताया। पीएम मोदी ने सनाए ताकाइची को “छोटी बहन” और दूरदर्शी नेता कहते हुए दोनों देशों के गहरे होते रिश्तों को रेखांकित किया।

रक्षा सहयोग में ऐतिहासिक शुरुआत

इस समिट का सबसे अहम पहलू रक्षा क्षेत्र में हुआ पहला रक्षा सह-विकास (Defence Co-development) समझौता रहा। इसके तहत भारत और जापान मिलकर रक्षा तकनीकों का संयुक्त विकास करेंगे। यह कदम इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

10 ट्रिलियन येन निवेश का लक्ष्य

भारत ने अगले 10 वर्षों में जापान से 10 ट्रिलियन येन निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा है। यह निवेश विनिर्माण, इन्फ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक तकनीक और औद्योगिक विकास को गति देगा। पीएम मोदी ने बताया कि बीते एक साल में दोनों देशों के बीच करीब 120 कारोबारी समझौते पहले ही हो चुके हैं।

टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन पर फोकस

दोनों देशों ने आर्थिक सुरक्षा और सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए एक साझा रोडमैप पर सहमति जताई है। इसमें सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, क्रिटिकल मिनरल्स और नई तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इस साझेदारी का उद्देश्य वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच एक भरोसेमंद सप्लाई नेटवर्क तैयार करना है, जिससे उद्योगों और अर्थव्यवस्थाओं पर असर कम किया जा सके।

भारत-जापान समिट को दोनों देशों के बीच अब तक की सबसे व्यापक रणनीतिक साझेदारी में से एक माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में एशिया की भू-राजनीति और आर्थिक परिदृश्य को नई दिशा दे सकती है।

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