Knews Desk- सनातन धर्म में पूजा-पाठ के दौरान देवी-देवताओं को भोग अर्पित करने की परंपरा का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा, भक्ति और शुद्ध मन से अर्पित किया गया भोग भगवान को प्रसन्न करता है और साधक पर उनकी कृपा बनी रहती है। शास्त्रों में प्रत्येक देवी-देवता के प्रिय भोग का उल्लेख मिलता है। यदि पूजा के दौरान उनके पसंदीदा प्रसाद का भोग लगाया जाए, तो पूजा का फल अधिक शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं कि किस देवी-देवता को कौन सा भोग सबसे प्रिय है।भगवान शिव को अत्यंत सरल और सात्विक भोग प्रिय माना जाता है। शिवलिंग पर दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से तैयार पंचामृत अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा भगवान शिव को रेवड़ी, मिश्री, चिरौंजी, गुड़ और भुने हुए चने का भोग भी अर्पित किया जाता है। विशेष रूप से सावन के महीने में गुड़, चना और पंचामृत का भोग लगाने से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
भगवान विष्णु को खीर का भोग सबसे अधिक प्रिय माना गया है। खीर में किशमिश, बादाम, काजू, पिस्ता, मखाना, नारियल की कतरन, इलायची और केसर मिलाकर अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा सूजी का हलवा भी भगवान विष्णु को प्रिय है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु को लगाया जाने वाला कोई भी भोग तुलसी दल के बिना पूर्ण नहीं माना जाता। इसलिए भोग में तुलसी के पत्ते अवश्य शामिल करने चाहिए।
धन की देवी माता लक्ष्मी को सफेद और पीले रंग की मिठाइयां विशेष रूप से प्रिय हैं। उन्हें केसर भात, खीर, पेड़ा, बर्फी और अन्य सात्विक मिठाइयों का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि शुक्रवार या विशेष पूजा के अवसर पर माता लक्ष्मी को इन चीजों का भोग लगाने से घर में सुख-समृद्धि और धन का आगमन होता है।
भगवान गणेश को मोदक सबसे प्रिय माना जाता है। इसके अलावा मोतीचूर के लड्डू, नारियल के लड्डू, तिल के लड्डू और सूजी से बने लड्डू भी उन्हें अर्पित किए जा सकते हैं। गणेश चतुर्थी और बुधवार के दिन इनका भोग लगाने से भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है और सभी विघ्न दूर होते हैं।
हनुमान जी को बूंदी, बेसन का हलवा, पंचमेवा, गुड़ के लड्डू, केसर भात और डंठल वाला पान प्रिय माना जाता है। मंगलवार और शनिवार को इनका भोग लगाने से बजरंगबली प्रसन्न होकर भक्तों को साहस, शक्ति और संकटों से रक्षा का आशीर्वाद देते हैं।
भगवान श्रीराम को खीर, केसर भात, धनिए से बने प्रसाद, कलाकंद, बर्फी और गुलाब जामुन का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। इन सात्विक प्रसादों के साथ श्रद्धापूर्वक पूजा करने से भगवान श्रीराम का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
माता दुर्गा को खीर, हलवा, मालपुआ, केले, नारियल और विभिन्न प्रकार की मिठाइयों का भोग लगाया जाता है। वहीं नवरात्रि के दौरान काले चने और सूजी के हलवे का भोग विशेष रूप से अर्पित किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इससे माता दुर्गा प्रसन्न होकर भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।
भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री सबसे अधिक प्रिय है। इसके अलावा खीर, मावा-मिश्री के लड्डू, हलवा और दूध से बने विभिन्न व्यंजनों का भोग भी उन्हें अर्पित किया जाता है। जन्माष्टमी सहित अन्य विशेष अवसरों पर इनका भोग लगाने से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।सनातन धर्म में भोग का महत्व केवल भोजन अर्पित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह श्रद्धा, समर्पण और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार शुद्ध मन, सात्विक भोजन और विधि-विधान से अर्पित किया गया भोग देवी-देवताओं को प्रसन्न करता है और जीवन में सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य तथा आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। इसलिए पूजा के दौरान अपनी आराध्य देवी या देवता के प्रिय भोग को श्रद्धापूर्वक अर्पित करना शुभ और फलदायी माना गया है।