कोचिंग सेंटर में छात्रों की सुरक्षा के लिए दिल्ली सरकार का बड़ा कदम, 3 महीने में बनेगा नया कानून

KNEWS DESK – कोचिंग सेंटर्स में छात्रों की सुरक्षा को लेकर दिल्ली सरकार ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है। कैबिनेट मंत्री आशीष सूद ने बताया कि राजधानी में कोचिंग संस्थानों के लिए जल्द ही नया कानून लाया जाएगा। यह कानून छात्रों की सुरक्षा, फीस रेगुलेशन और कोचिंग सेंटरों के संचालन से जुड़े नियमों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा।

3 महीने में तैयार होगा कानून का ड्राफ्ट

मंत्री आशीष सूद के मुताबिक, जस्टिस गौबा कमेटी की सिफारिशों के आधार पर नए कानून का प्रारूप तैयार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अगले तीन महीने के भीतर नियमों का ड्राफ्ट तैयार होने की उम्मीद है।

इस कानून में कोचिंग संस्थानों में सेफ्टी नॉर्म्स, फीस नियंत्रण और छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं से जुड़े प्रावधान शामिल किए जाएंगे।

924 कोचिंग सेंटरों का होगा सेफ्टी और फाइनेंस ऑडिट

लखनऊ कोचिंग सेंटर अग्निकांड जैसी घटनाओं को देखते हुए दिल्ली सरकार ने राजधानी के 924 कोचिंग सेंटरों की जांच का फैसला लिया है। इन संस्थानों का सेफ्टी और फाइनेंशियल ऑडिट किया जाएगा।

आशीष सूद ने कहा कि एक महीने के भीतर सभी कोचिंग सेंटरों की इमारतों और व्यवस्थाओं की जांच पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। जो संस्थान नियमों का उल्लंघन करते पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई

मंत्री ने कहा कि जांच के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करने वाले कोचिंग सेंटरों को नोटिस जारी किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर ऐसे संस्थानों को सील भी किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली देश की राजधानी है और यहां देशभर से छात्र पढ़ाई के लिए आते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है।

कोचिंग फीस और शिक्षा व्यवस्था पर भी नजर

नए कानून के तहत सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, बल्कि कोचिंग सेंटरों की फीस व्यवस्था और छात्रों को दी जाने वाली शिक्षा की गुणवत्ता की भी समीक्षा की जाएगी।

सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि कोचिंग संस्थान तय नियमों के अनुसार संचालित हों और छात्रों को बेहतर व सुरक्षित माहौल मिले।

इमरजेंसी पर NCERT के कदम का किया समर्थन

वहीं, NCERT की कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तक में आपातकाल (Emergency) से जुड़ा सेक्शन शामिल किए जाने पर आशीष सूद ने इसका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को आपातकाल के दौरान हुई घटनाओं की जानकारी होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि लोगों को बिना आरोप के हिरासत में रखा गया था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर असर पड़ा था। युवाओं को लोकतंत्र और आजादी की अहमियत समझना जरूरी है।

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