Knews Desk, लखनऊ अग्निकांड के बाद प्रशासनिक तंत्र में बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू हो गई है। एक तरफ जहां एसआईटी जांच तेजी से आगे बढ़ रही है, वहीं लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने शहर में नियमों के खिलाफ चल रहे प्रतिष्ठानों पर सख्त अभियान छेड़ दिया है। जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताओं और फर्जी दस्तावेजों का खुलासा हुआ है।
SIT जांच में अफसरों से पूछताछ तेज
अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और लखनऊ जोन के एडीजी प्रवीण कुमार की दो सदस्यीय एसआईटी लगातार संबंधित विभागों के अधिकारियों से पूछताछ कर रही है। जिला प्रशासन, बिजली विभाग और नगर निगम के अफसरों से निर्माण अनुमति, अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों से जुड़े सवाल पूछे जा रहे हैं।
एसआईटी ने पिछले 10 वर्षों में बिल्डिंग को दी गई अनुमति, अवैध निर्माण पर की गई कार्रवाई और सुरक्षा मानकों के पालन का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है। जांच टीम अब मृतकों के परिजनों, घायलों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज करेगी।
जांच में बड़ा खुलासा: फर्जी NOC से मिला बिजली कनेक्शन
जांच में एक बड़ा खुलासा सामने आया है कि अलीगंज स्थित जिस बिल्डिंग में आग लगी थी, उसके वाणिज्यिक बिजली कनेक्शन के लिए जारी किया गया विद्युत सुरक्षा निदेशालय का अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) फर्जी पाया गया है। वर्ष 2016 में इसी दस्तावेज के आधार पर भवन का घरेलू से वाणिज्यिक बिजली कनेक्शन किया गया था।
नियमों के अनुसार किसी भी वाणिज्यिक या औद्योगिक कनेक्शन से पहले विद्युत सुरक्षा निदेशालय की वैध एनओसी अनिवार्य होती है, जिसकी अनदेखी इस मामले में सामने आई है।
19 अधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी
लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने 19 इंजीनियरों और जोनल अधिकारियों के नाम शासन को भेज दिए हैं। इनमें 6 पीसीएस स्तर के अधिकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं। यह पहली बार है जब किसी अग्निकांड मामले में इतने वरिष्ठ अधिकारियों को जांच के दायरे में लाया गया है।
शहरभर में LDA का सख्त अभियान
अग्निकांड के बाद एलडीए ने शहरभर में मानकों के विपरीत संचालित प्रतिष्ठानों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। अभियान के दौरान 71 प्रतिष्ठानों को सील किया गया, जबकि 83 भवन मालिकों और प्रबंधकों को नोटिस जारी किया गया है।
अवैध निर्माण पर सवाल, बगल की बिल्डिंग पर भी अनदेखी का आरोप
स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि जिस इमारत में आग लगी, उसकी जांच तो की जा रही है, लेकिन उसके पास स्थित एक और कथित अवैध बिल्डिंग पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। बताया जा रहा है कि वह भवन भी आवासीय अनुमति के बावजूद व्यावसायिक उपयोग में लाया जा रहा है, लेकिन फिलहाल उस पर प्रशासन की नजर नहीं पड़ी है।
जांच जारी, और खुलासों की उम्मीद
एसआईटी और प्रशासनिक जांच अभी जारी है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और भी चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं, जिससे लापरवाही और नियमों की अनदेखी की पूरी तस्वीर साफ होगी।