लखनऊ अग्निकांड: सस्पेंडेड FSSO का बड़ा यू-टर्न, CFO पर आरोप लगाने के बाद मांगी माफी, कहा— ‘भ्रमित करके बनवाया गया था पहला वीडियो’

डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज कोचिंग सेंटर हादसे के बाद प्रशासनिक गलियारों में मचे हड़कंप के बीच एक नया और बेहद चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। हादसे के बाद सस्पेंड किए गए इंदिरानगर के एफएसएसओ (FSSO) कमलेन्द्र कुमार सिंह, जिन्होंने पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर और वीडियो जारी कर सीधे मुख्य अग्निशमन अधिकारी को जिम्मेदार ठहराया था, अब अपने बयानों से पूरी तरह पलट गए हैं। कमलेन्द्र सिंह ने एक नया वीडियो जारी कर अपने पहले के कदम के लिए माफी मांगी है। उनका कहना है कि पिछला वीडियो किसी ने उन्हें भ्रमित करके बनवाया था और उन्हें अपने वरिष्ठ अधिकारियों व निष्पक्ष जांच पर पूरा भरोसा है।

पहले पत्र में लगाया था बड़ा आरोप; “कमरों का हो रहा था गलत इस्तेमाल, जिम्मेदार CFO”

इससे पहले मुख्यमंत्री को भेजे गए अपने पत्र में कमलेन्द्र कुमार सिंह ने अपनी सस्पेंशन की कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बताते हुए विभाग के बड़े अफसरों को कटघरे में खड़ा किया था। उन्होंने दलील दी थी कि एक एफएसएसओ का कार्यक्षेत्र बेहद सीमित होता है और उनका काम सिर्फ स्थानीय स्तर पर निरीक्षण कर रिपोर्ट देना है। उन्होंने सीधे तौर पर सीएफओ को निशाने पर लेते हुए कहा था कि बिल्डिंग को ‘फायर क्लीयरेंस’ देने और शहर की पूरी सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी मुख्य अग्निशमन अधिकारी की होती है। पत्र में उन्होंने यह भी गंभीर आरोप लगाया था कि जिस भवन को आवासीय मंजूरी मिली थी, उसका सालों से धड़ल्ले से व्यावसायिक उपयोग हो रहा था, जिसकी जानकारी बड़े अधिकारियों को पहले से थी। साथ ही उन्होंने रेस्क्यू ऑपरेशन में देरी और तालमेल की कमी के आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी।

जांच के घेरे में हैं सस्पेंड हुए चार अधिकारी

इस दर्दनाक हादसे के बाद शासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जिन चार अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया था, उनके नाम इस प्रकार हैं:

  1. गौरव कुमार (अधिशासी अभियंता, कलेक्शन, जानकीपुरम)
  2. कमलेन्द्र कुमार सिंह (एफएसएसओ, इंदिरानगर)
  3. अनिल कुमार (सहायक अभियंता)
  4. प्रमोद पांडे (कनिष्ठ अभियंता)

प्रशासनिक गलियारों में चर्चाएं तेज, जनता की नजरें जांच पर

FSSO कमलेन्द्र कुमार सिंह के इस अचानक आए यू-टर्न के बाद अब फायर विभाग और प्रशासनिक महकमे में कयासों का दौर शुरू हो गया है। चर्चा है कि क्या उन पर कोई विभागीय दबाव था या वाकई वह किसी के बहकावे में आ गए थे? बहरहाल, 15 युवाओं की मौत से आक्रोशित पीड़ित परिवारों और आम जनता की निगाहें अब भी इस बात पर टिकी हैं कि सरकार की हाई-लेवल जांच में आखिरकार इस महालापरवाही के असली गुनहगारों का पर्दाफाश कब और किस स्तर पर होता है।

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