डिजिटल डेस्क- अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और दान में हेराफेरी का मामला थमने के बजाय हर दिन और गहराता जा रहा है। इस पूरे विवाद के बीच अब रामलला को दान में दी गई ‘चांदी की कागभुसुंडि’ के गायब होने की एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। इस नए खुलासे के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तंज कसते हुए लिखा कि बिना एफआईआर के एसआईटी की जांच ‘बिना तीर की कमान’ जैसी है।
“नेपाल और बाकी बॉर्डर बंद करो, कहीं आरोपी भाग न जाएं”
सपा प्रमुख ने चढ़ावा चोरी को लेकर सनातनी आस्थावानों में बढ़ते आक्रोश का जिक्र करते हुए सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि जिस तरह हर दिन ‘चढ़ावा-चंदा-दान’ चोरी का नया भंडाफोड़ हो रहा है, उसे देखते हुए तुरंत नेपाल और बाकी अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर बंद कर देने चाहिए ताकि इस महापाप के आरोपी देश छोड़कर फरार न हो सकें। अखिलेश यादव ने एसआईटी के गठन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब अभी रोज नए खुलासे हो ही रहे हैं, तो एसआईटी की जांच क्या हासिल कर लेगी? उन्होंने आरोप लगाया कि यह ‘जांच’ से ज्यादा मामले को ‘ढांक’ (छिपाने) के लिए बनी है।
कैसल ग्रुप का बड़ा दावा: “चंपत राय को दी थीं 200 किलो चांदी की ईंटें, नहीं मिली रसीद”
इस महाविवाद में एक और सनसनीखेज मोड़ तब आया जब कैसल ग्रुप ऑफ कंपनीज के एमडी डॉ. राजू वी. मनवानी ने राम मंदिर ट्रस्ट पर गंभीर सवाल उठाए। न्यूज़ एजेंसी एएनआई (ANI) से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि उन्होंने मंदिर निर्माण के लिए चंपत राय को एक-एक किलोग्राम वजन वाली 200 चांदी की ईंटें सौंपी थीं, लेकिन उन्हें उस वक्त इसकी कोई रसीद नहीं दी गई थी। डॉ. मनवानी ने कहा, “हमने पहले कभी सवाल नहीं उठाया, लेकिन अब जो खबरें आ रही हैं, उससे चिंता हो रही है कि हमारी दान की हुई चांदी गलत जगह तो नहीं चली गई? इसलिए हमने अब रसीद और इसके इस्तेमाल की जानकारी मांगी है।”
SIT ने सरकार को सौंपी रिपोर्ट, लेकिन अब तक FIR नहीं
गौरतलब है कि चढ़ावे की चोरी के मामले में मचे देशव्यापी बवाल को देखते हुए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बीती 13 जून को एक उच्च स्तरीय एसआईटी (SIT) का गठन किया था। इस तीन सदस्यीय टीम में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, लखनऊ आईजी रेंज किरन एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन शामिल थे। एसआईटी ने कई दिनों की गहन जांच और पूछताछ के बाद शासन को अपनी सीलबंद रिपोर्ट सौंप दी है। हालांकि, रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद भी अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की गई है, जिसे लेकर विपक्ष और आम जनता में नाराजगी और सस्पेंस दोनों बरकरार है।