NEET री-एग्जाम महाफर्जीवाड़ा… AIIMS और BHU के MBBS छात्र बने ‘डमी कैंडिडेट’, बिहार में 30 गिरफ्तार

डिजिटल डेस्क- बिहार के लखीसराय जिले में नीट पुनर्परीक्षा के दौरान एक बहुत बड़े और संगठित फर्जीवाड़े का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 4 परीक्षा केंद्रों से फर्जी अभ्यर्थी (स्कॉलर्स), उनके सहयोगियों और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन करने वाले कर्मियों सहित कुल 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह कोई साधारण धोखाधड़ी नहीं, बल्कि एक अंतरराज्यीय परीक्षा माफिया नेटवर्क का हिस्सा है, जो मोटी रकम के बदले असली अभ्यर्थियों की जगह डमी कैंडिडेट्स को परीक्षा में बैठा रहा था।

नामी मेडिकल कॉलेजों के छात्र निकले ‘मुन्नाभाई’, मोटी रकम का लालच

जांच एजेंसियों के लिए सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि गिरफ्तार किए गए कथित स्कॉलर्स देश के बेहद प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे MBBS और नर्सिंग के छात्र हैं। गिरफ्तार आरोपियों में न्यू जलपाईगुड़ी मेडिकल कॉलेज के मंतोष कुमार, एएनएमसीएच गया के विवेक कुमार, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज सतना के हिमांशु कुमार, एम्स (AIIMS) रायबरेली के सौरभ जीझा, बीएचयू (BHU) नर्सिंग की पूनम कुमारी, यूसीएमएस दिल्ली के अमन अग्रवाल और एनएमसीएच पटना के रौशन कुमार जैसे छात्र शामिल हैं। पुलिस को आशंका है कि इन होनहार छात्रों को भारी-भरकम रकम का लालच देकर इस अवैध धंधे में धकेला गया था।

फर्जी पहचान पत्र और बायोमेट्रिक कर्मियों की मिलीभगत से एंट्री

पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि असली अभ्यर्थियों की जगह डमी परीक्षार्थियों को परीक्षा हॉल के अंदर भेजने के लिए बकायदा फर्जी पहचान पत्र और कूट रचित (फर्जी) दस्तावेज तैयार किए गए थे। केवल दस्तावेज ही नहीं बदले गए, बल्कि परीक्षा केंद्र के भीतर होने वाली बायोमेट्रिक सत्यापन की पूरी प्रक्रिया को भी प्रभावित किया गया। बायोमेट्रिक जांच में लगे कुछ कर्मियों और सुपरवाइजरों ने मिलीभगत कर इन फर्जी परीक्षार्थियों को एंट्री दिलाई। इसी वजह से पुलिस ने बड़ी संख्या में बायोमेट्रिक ऑपरेटरों को भी नामजद कर गिरफ्तार किया है।

डीएम बोले—संगठित गिरोह का काम, किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा

लखीसराय के जिलाधिकारी शैलेन्द्र कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि प्राथमिक जांच में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि परीक्षा की निष्पक्षता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। अनुमंडल पदाधिकारी और पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में बनी विशेष टीम गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है, जिससे इस रैकेट के मास्टरमाइंड तक पहुंचने के कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। प्रशासन का कहना है कि इस मामले में शामिल चाहे कोई कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा और सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *