डिजिटल डेस्क- लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड में अब तक 15 मासूम जिंदगियां काल के गाल में समा चुकी हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि जिस भवन में यह हादसा हुआ, वह कागजों में रिहायशी था, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर उसकी हर मंजिल पर व्यावसायिक गतिविधियां चलाई जा रही थीं। इमारत में फायर सेफ्टी के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं थे, सीढ़ियां संकरी थीं और हादसे के वक्त बायोमेट्रिक लॉक बंद होने के कारण छात्र अंदर ही फंस गए। इस लापरवाही पर त्वरित एक्शन लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसआईटी का गठन किया है और लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी ने भी जांच कमेटी बनाई है। पुलिस अब तक बिल्डिंग के मालिक समेत कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की इन गंभीर धाराओं में दर्ज हुई FIR
लखनऊ पुलिस ने इस दर्दनाक हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों पर शिकंजा कसने के लिए भारतीय न्याय संहिता (BNS) और उत्तर प्रदेश अग्नि शमन सेवा अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है। कानून के जानकारों के मुताबिक, अगर पुलिस इन धाराओं के तहत मजबूत चार्जशीट दाखिल करती है, तो दोषियों को अधिकतम आजीवन कारावास (उम्रकैद) तक की सजा हो सकती है। आइए समझते हैं कि एफआईआर में कौन-कौन सी धाराएं लगाई गई हैं:
- बीएनएस धारा 105 (आपराधिक मानव वध): यह धारा तब लगाई जाती है जब हत्या करने का सीधा इरादा न हो, लेकिन आरोपी को यह अच्छी तरह पता हो कि उसकी लापरवाही से किसी की जान जा सकती है। इसके तहत उम्रकैद या 10 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।
- बीएनएस धारा 110 (गंभीर अपराध/हत्या का प्रयास): इस धारा के तहत सामान्य परिस्थितियों में 10 साल की कैद और विशेष परिस्थितियों में आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।
- बीएनएस धारा 125 (दूसरों के जीवन को खतरे में डालना): रिहायशी इमारत में बिना फायर एग्जिट के कोचिंग चलाना और अवैध निर्माण करना इसी श्रेणी में आता है। धारा 125(A) के तहत 3 महीने की जेल और 125(B) के तहत गंभीर चोट पहुंचने पर 3 साल तक की कैद या 10 हजार रुपये जुर्माना हो सकता है।
- बीएनएस धारा 3(5) (साझा आपराधिक मंशा): जब एक से अधिक लोग (जैसे बिल्डिंग मालिक, कोचिंग संचालक और प्रबंधन) मिलकर नियमों की अनदेखी करते हैं, तो यह धारा लगती है। इसके तहत हर दोषी को मुख्य अपराध (जैसे धारा 105 या 110) की पूरी सजा अकेले भुगतनी पड़ती है।
- उत्तर प्रदेश अग्नि शमन सेवा अधिनियम (धारा 6/10): फायर सेफ्टी मानकों की घोर अनदेखी करने और नियमों का उल्लंघन करने के लिए यह विशेष अधिनियम लागू किया गया है।
आगे बढ़ सकती हैं मुश्किलें, लागू हो सकती है धारा 106
हालांकि पुलिस ने शुरुआती एफआईआर में बीएनएस धारा 106 (लापरवाही से मौत) का इस्तेमाल नहीं किया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि एसआईटी की जांच आगे बढ़ने पर इसे भी जोड़ा जा सकता है। कोचिंग सेंटर मालिकों द्वारा सुरक्षा इंतजामों में की गई कोताही और अवैध कमर्शियल इस्तेमाल साबित होने पर इस धारा के तहत 2 साल तक की कैद या जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा, एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद आरोपियों पर कई अन्य विभागीय और नगर निगम बायलॉज के उल्लंघन की धाराएं भी बढ़ाई जा सकती हैं।
समय पर चार्जशीट दाखिल होना है सबसे बड़ी चुनौती
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सीएम योगी आदित्यनाथ अपने कार्यक्रम रद्द कर लखनऊ पहुंचे हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के वकील विनीत जिंदल के मुताबिक, असली कानूनी लड़ाई कुछ दिनों बाद शुरू होगी जब यह मामला शांत पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे गंभीर मामलों में पुलिस को 60 दिनों के भीतर अदालत में चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल करनी होगी। अगर तय समय सीमा के भीतर पुख्ता सबूतों के साथ चार्जशीट दाखिल नहीं की गई, तो तकनीकी आधार पर आरोपियों को आसानी से जमानत मिल सकती है। ऐसे में दोषियों को सख्त सजा दिलाने के लिए त्वरित और सटीक विवेचना बेहद जरूरी है।