केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने तत्काल प्रभाव से किया स्वीकार

डिजिटल डेस्क- अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर संविधान के अनुच्छेद 75 के खंड (2) के तहत, केंद्रीय मंत्रिपरिषद से उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। केरल बीजेपी के नेता जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो गया था, जिसके बाद उन्होंने यह कदम उठाया। 65 वर्षीय जॉर्ज कुरियन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली तीसरी केंद्रीय कैबिनेट में अहम भूमिका में थे। अल्पसंख्यक मामलों के पोर्टफोलियो के अलावा, वे मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में भी राज्य मंत्री के रूप में कार्यरत थे। मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद के रूप में उनका कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही इन दोनों मंत्रालयों में उनका सफर आधिकारिक तौर पर थम गया।

तरुण चुग को मिला टिकट, कयासों पर लगी मुहर

बीजेपी ने पहले ही संकेत दे दिया था कि पार्टी जॉर्ज कुरियन को फिर से राज्यसभा नहीं भेज रही है। उनकी जगह मध्य प्रदेश से बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग को राज्यसभा का टिकट दिया गया, जिसके बाद से ही कुरियन के इस्तीफे की अटकलें तेज थीं। जॉर्ज कुरियन केंद्रीय राज्य मंत्री बनने के बाद अगस्त 2024 में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे।

केरल विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन बनी वजह

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि केरल विधानसभा चुनावों में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के कारण उन्हें दोबारा राज्यसभा के लिए नॉमिनेट नहीं किया गया। कुरियन ने इस साल केरल के कंजीरापल्ली से चुनाव लड़ा था, लेकिन उनका प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। वे इस सीट पर पूर्व केंद्रीय मंत्री अल्फोंस कन्ननथनम द्वारा हासिल किए गए वोटों का आंकड़ा भी नहीं छू पाए थे।

जानिए कौन हैं जॉर्ज कुरियन

जॉर्ज कुरियन बीजेपी के एक कद्दावर नेता हैं और 1980 में पार्टी की शुरुआत से ही इसके वफादार सदस्य रहे हैं। राजनीति के साथ-साथ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में वकील के तौर पर भी प्रैक्टिस की है। केरल के कोट्टायम जिले में जन्मे कुरियन ने कानून (लॉ) में पोस्ट-ग्रेजुएशन किया है। वे इससे पहले राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय रेल राज्य मंत्री ओ. राजगोपाल के ओएसडी (OSD) के रूप में भी काम कर चुके हैं।

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