डिजिटल डेस्क- ओडिशा से सामने आई एक अत्यंत दुखद और दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इस घटना में बैंकिंग सिस्टम की संवेदनहीनता इस कदर हावी थी कि एक बेबस आदिवासी व्यक्ति को अपनी मृत बहन के सेविंग्स अकाउंट से जमा पूंजी निकालने के लिए सबूत के तौर पर उसका ‘कंकाल’ लेकर बैंक शाखा पहुंचना पड़ा था। इस अमानवीय और शर्मनाक घटना पर संज्ञान लेते हुए अब केंद्र सरकार ने बेहद सख्त कदम उठाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित बैंक के ब्रांच मैनेजर को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को पत्र लिखने के बाद हुई कार्रवाई
राजनीतिक हस्तक्षेप के बाद खुली फाइल यह पूरी कार्रवाई केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी द्वारा ओडिशा विधानसभा में विपक्ष के नेता (LoP) और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को लिखे गए एक पत्र के बाद सार्वजनिक हुई है। दरअसल, नवीन पटनायक ने 2 मई को केंद्रीय मंत्री को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने बैंक में प्रक्रियात्मक देरी और नियमों की आड़ में एक गरीब आदिवासी परिवार को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किए जाने का मुद्दा बेहद आक्रामक ढंग से उठाया था, जिसके बाद वित्त मंत्रालय एक्शन में आया।
खाताधारक के खाते में नहीं दर्ज था कोई नॉमिनी
नॉमिनी न होने के कारण उलझा था मामला नवीन पटनायक के पत्र का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि वित्तीय सेवा विभाग ने ओडिशा ग्रामीण बैंक के माध्यम से इस पूरे मामले की गहन जांच कराई। बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, मृत महिला खाताधारक ‘कालरा मुंडा’ के अकाउंट में कोई भी जीवित नॉमिनी दर्ज नहीं था। नियमतः ऐसी स्थिति में क्लेम के निपटारे के लिए डेथ सर्टिफिकेट या कानूनी उत्तराधिकारी के प्रामाणिक दस्तावेज जमा करना अनिवार्य था, जिसे लेकर बैंक प्रबंधन ने बेहद असंवेदनशील रवैया अपनाया। प्रशासन की मदद से क्लेम राशि का भुगतान केंद्रीय मंत्री ने पत्र में आगे जानकारी दी कि घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने इस मामले में हस्तक्षेप किया। प्रशासन की मदद से सभी जरूरी दस्तावेज जल्द से जल्द तैयार कराए गए और मृतका के खाते में जमा ₹19,402 की क्लेम राशि उसके भाई जीतू मुंडा और दो अन्य कानूनी उत्तराधिकारियों को सुरक्षित सौंप दी गई।