आज रात बंद होंगे मां कामाख्या के कपाट, जानिए कब फिर होंगे दिव्य दर्शन

KNEWS DESK – असम के गुवाहाटी स्थित निलांचल पर्वत पर स्थित मां कामाख्या देवी मंदिर एक बार फिर अपनी अनूठी धार्मिक परंपराओं को लेकर सुर्खियों में है। यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है और इसे शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र कहा जाता है। मान्यता है कि यहां माता सती का योनि भाग गिरा था, जिसके कारण यह स्थान तांत्रिक साधना और शक्ति उपासना का विशेष केंद्र बन गया।

आज रात से शुरू होगा अंबुबाची मेला

हर साल की तरह इस वर्ष भी प्रसिद्ध अंबुबाची मेले की शुरुआत आज रात से होगी। धार्मिक परंपरा के अनुसार रात 9 बजकर 8 मिनट 42 सेकंड पर ‘प्रवृत्ति’ अनुष्ठान किया जाएगा और इसके साथ ही मंदिर के कपाट भक्तों के दर्शन के लिए बंद कर दिए जाएंगे।

देवी के विश्राम का समय मानी जाती है यह अवधि

मान्यता है कि इस दौरान मां कामाख्या “राजस्वला” होती हैं, यानी उनका मासिक धर्म काल होता है। इसी कारण इस समय को देवी के विश्राम का काल माना जाता है और मंदिर के गर्भगृह में पूजा-अर्चना अस्थायी रूप से रोक दी जाती है।

इस दौरान मंदिर परिसर में किसी प्रकार की सामान्य पूजा नहीं होती और इसे आस्था व प्रकृति के संतुलन का प्रतीक माना जाता है।

26 जून को खुलेंगे मंदिर के कपाट

मंदिर प्रशासन के अनुसार 26 जून की सुबह ‘निवृत्ति’ अनुष्ठान के बाद मंदिर के कपाट पुनः खोल दिए जाएंगे। इसके बाद श्रद्धालु मां कामाख्या के दर्शन और पूजन कर सकेंगे।

अंबुबाची मेले की विशेष परंपराएं

इस मंदिर के गर्भगृह में किसी प्रतिमा की पूजा नहीं होती, बल्कि योनि आकार की शिला की उपासना की जाती है, जिससे निरंतर जल प्रवाहित होता रहता है। मेले के दौरान पुजारी इस शिला के पास सफेद वस्त्र रखते हैं, जिसे बाद में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।

मान्यता है कि कपाट बंद रहने के दौरान रखा गया यह वस्त्र जब मंदिर खुलता है तो लाल रंग का हो जाता है, जिसे ‘अंगोदक वस्त्र’ या ‘अंबुबाची वस्त्र’ कहा जाता है और इसे भक्तों में प्रसाद स्वरूप बांटा जाता है।

अंबुबाची मेला केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं बल्कि शक्ति उपासना, तंत्र साधना और आस्था का एक बड़ा संगम माना जाता है। इस अवसर पर देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, साधु-संत और तांत्रिक गुवाहाटी पहुंचते हैं और विशेष साधना में भाग लेते हैं।

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