योग कोई धर्म या शरीर मोड़ने की प्रक्रिया नहीं, असीम संभावनाओं को जगाने का विज्ञान है- आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु

डिजिटल डेस्क- अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के विशेष अवसर पर प्रख्यात आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने योग के वास्तविक स्वरूप को लेकर दुनिया को एक बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि योग कोई धर्म, विचारधारा या सिर्फ शरीर को मोड़ने-तोड़ने की कोई प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह इंसान के भीतर मौजूद असीम संभावनाओं को जगाने का एक संपूर्ण विज्ञान है। सद्गुरु ने समझाया कि जिस तरह बाहरी दुनिया को सुखद और बेहतर बनाने के लिए विज्ञान और तकनीक की आवश्यकता होती है, उसी तरह हमारे मन और आत्मा के कल्याण के लिए भी एक विज्ञान काम करता है, जिसे हम योग कहते हैं। उन्होंने दुनिया भर के लोगों से योग को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का अनिवार्य हिस्सा बनाने की भावुक अपील की।

योग धर्म, जाति और लिंग के बंधनों से परे है

एक विशेष वीडियो संदेश के जरिए अपनी बात रखते हुए सद्गुरु ने कहा कि योग किसी विशेष धर्म, जाति, नस्ल, समुदाय या लिंग के दायरे में बंधा हुआ नहीं है। यह धरती के हर इंसान के लिए समान रूप से उपयोगी और सुलभ है। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि बहुत से लोग आज भी योग को केवल एक शारीरिक व्यायाम या फिटनेस का जरिया समझते हैं, जबकि इसका वास्तविक उद्देश्य इससे कहीं ज्यादा व्यापक है। सद्गुरु के अनुसार, योग मुख्य रूप से मनुष्य के शरीर, मन, भावनाओं, बुद्धि और उसकी आंतरिक ऊर्जा के बीच एक सटीक संतुलन स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त करता है।

मानव जीवन की छिपी हुई क्षमता को बाहर लाता है योग

इंसान की कार्यक्षमता को बढ़ाने में योग की भूमिका को रेखांकित करते हुए सद्गुरु ने कहा कि हर मनुष्य के भीतर एक असाधारण क्षमता और छिपी हुई प्रतिभा होती है। योग उसी सोई हुई क्षमता को बाहर लाने का सबसे प्रामाणिक माध्यम है। उन्होंने विस्तार से बताया कि योग मानव शरीर और दिमाग को उनके सर्वश्रेष्ठ स्तर पर काम करने के लिए पूरी तरह तैयार करता है। इसके नियमित अभ्यास से इंसान के सोचने, समझने और सही समय पर सटीक निर्णय लेने की मानसिक क्षमता अविश्वसनीय रूप से मजबूत हो जाती है। यदि मानव जीवन को उसकी पूरी ऊंचाई और क्षमता तक ले जाना है, तो योग से बेहतर कोई दूसरा साधन नहीं हो सकता।

तनाव और मानसिक अवसाद का सबसे प्रभावी प्राकृतिक उपचार

आज की आधुनिक और भागदौड़ भरी जीवनशैली में बढ़ते तनाव, चिंता और मानसिक विकारों पर बोलते हुए सद्गुरु ने कहा कि योग लोगों को बाहरी दुनिया के बजाय अपने भीतर की समस्याओं का ठोस समाधान खोजने का रास्ता दिखाता है। उन्होंने भरोसा जगाते हुए कहा कि दुनिया की हर मानसिक समस्या का कोई न कोई समाधान हमारे भीतर ही मौजूद है, और योग उस समाधान तक सुरक्षित पहुंचने का एक प्रभावी व जादुई साधन है। योग मन के अनचाहे कोलाहल को शांत करता है और व्यक्ति को भीतर से इतना मजबूत बना देता है कि वह किसी भी विपरीत परिस्थिति में विचलित नहीं होता।

रोज निकालें सिर्फ 7 मिनट, जीवन में आएगा चमत्कारी बदलाव

सद्गुरु ने व्यस्त दिनचर्या का बहाना बनाने वाले लोगों को एक बेहद सरल और व्यावहारिक मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति दिनभर की भागदौड़ में लंबी योग साधना के लिए समय नहीं निकाल पा रहा है, तब भी उसे अपने चौबीस घंटों में से कम से कम सात मिनट योग के लिए जरूर निकालने चाहिए। केवल सात मिनट का यह छोटा सा नियमित अभ्यास भी व्यक्ति के जीवन और स्वास्थ्य में एक बहुत बड़ा और क्रांतिकारी सकारात्मक बदलाव ला सकता है। यह छोटी सी शुरुआत शरीर और मन को रीबूट करने और एक स्वस्थ जीवन की नींव रखने के लिए काफी है।

‘योग फॉर हेल्दी एजिंग’ थीम पर आधारित है इस बार का योग दिवस

वर्ष 2026 में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का यह 12वां सफल आयोजन हो रहा है। इस वर्ष पूरे विश्व में इस खास दिन को ‘योग फॉर हेल्दी एजिंग’ (स्वस्थ और सक्रिय वृद्धावस्था के लिए योग) की विशेष थीम के साथ मनाया जा रहा है। इस थीम का मुख्य उद्देश्य दुनिया को यह समझाना है कि योग जीवन के अंतिम पड़ाव में भी इंसान को शारीरिक रूप से स्वस्थ, मानसिक रूप से सक्रिय और पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाए रखने में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकता है। सद्गुरु ने अंत में कहा कि अब वह समय आ चुका है जब दुनिया के हर कोने और हर व्यक्ति तक यह संदेश पहुंचे कि खुद को भीतर से रूपांतरित करने का सबसे सरल और सुलभ रास्ता योग ही है।

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