सामरिक प्रोजेक्ट या पर्यावरण की तबाही? ग्रेट निकोबार परियोजना पर जयराम रमेश ने केंद्र को घेरा, पूछा– आखिर जनता से क्या छिपा रही सरकार?

डिजिटल डेस्क- अंडमान सागर और दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की सामरिक उपस्थिति को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘ग्रेट निकोबार आइलैंड प्रोजेक्ट’ एक बार फिर बड़े विवादों में घिर गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने वर्तमान पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को एक नया पत्र लिखकर इस परियोजना में पारदर्शिता की भारी कमी और अपर्याप्त पर्यावरणीय प्रभाव आकलन का मुद्दा उठाया है। इससे पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी इस परियोजना की तीखी आलोचना करते हुए इसे पर्यावरण के लिए विनाशकारी बता चुके हैं। जयराम रमेश ने अपने पत्र में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के पिछले जवाबों को ‘निराशाजनक और असंतोषजनक’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्रालय द्वारा तय किए गए दिशानिर्देशों का इस प्रोजेक्ट में उल्लंघन हो रहा है। कांग्रेस नेता ने कहा कि नियमों के मुताबिक हर 6 महीने में कंप्लायंस (अनुपालन) रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए, लेकिन मार्च 2024 के बाद से ऐसी कोई भी रिपोर्ट जारी नहीं की गई है। इसके अलावा, प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग कमेटी की बैठकों के ब्योरे भी महीनों बाद अपलोड किए जा रहे हैं।

वन्यजीव और पर्यावरण से जुड़े कई प्लान अभी तक गायब

पूर्व पर्यावरण मंत्री ने दावा किया कि नवंबर 2022 में प्रोजेक्ट को एनवायरनमेंटल क्लीयरेंस मिलने के 15 दिनों के भीतर कंजर्वेशन और मिटिगेशन प्लान जमा करने थे, जो आज तक जनता के सामने नहीं आए हैं। इनमें वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) और सलीम अली सेंटर फॉर ऑर्निथोलॉजी के प्लान भी शामिल हैं। उन्होंने कोरल कॉलोनियों (मूंगे की चट्टानों) को बड़े पैमाने पर दूसरी जगह शिफ्ट करने की योजना को पूरी तरह ‘अवास्तविक और नामुमकिन’ बताया।जयराम रमेश ने पत्र में पूछा, “आखिर सरकार इन रिपोर्टों, अध्ययनों और योजनाओं को छिपाने के लिए इतनी ज्यादा अपारदर्शिता क्यों अपना रही है? मैं जो कुछ भी सार्वजनिक करने की मांग कर रहा हूं, उससे देश के सामरिक हितों को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा।”

गैलाथिया बे पर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट को बताया ‘पारिस्थितिक तबाही’

कांग्रेस ने इस सप्ताह की शुरुआत में भी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा था कि गैलाथिया बे (Galathea Bay) पर प्रस्तावित ट्रांसशिपमेंट पोर्ट ‘पारिस्थितिक तबाही का एक नुस्खा’ है। इस संबंध में जयराम रमेश रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को भी दो पत्र लिख चुके हैं, जिसमें कोरल कॉलोनियों के बड़े पैमाने पर नष्ट होने की चिंता जताई गई है।

राहुल गांधी का आरोप– ‘डिफेंस का बहाना झूठ, होटल-कसीनो बनाने की तैयारी’

इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का विरोध करते हुए लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इसे ‘लालच बनाम हरियाली’ की लड़ाई बताया है। राहुल गांधी का आरोप है कि सरकार की यह दलील पूरी तरह “झूठ” है कि यह प्रोजेक्ट सिर्फ डिफेंस और ट्रांसशिपमेंट पोर्ट के लिए है। उन्होंने दावा किया कि असल में इस बेहद संवेदनशील और अपूरणीय इकोलॉजिकल जमीन को एक विशेष बिजनेसमैन को फायदा पहुंचाने के लिए दिया जा रहा है ताकि वहां होटल और कसीनो बनाए जा सकें। राहुल गांधी ने हाल ही में अपनी अंडमान यात्रा का एक वीडियो जारी कर जनता से इस प्रोजेक्ट के खिलाफ एक ऑनलाइन याचिका पर हस्ताक्षर करने की भी अपील की है।

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