उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में आगामी वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने जा रहे है. जिसके चलते राजनीतिक दलों की तैयारियां जोरों पर और चुनावी सरगर्मी तेज है.लेकिन आगामी 2027 के प्रस्तावित विधानसभा चुनावों को लेकर असमंजस बढ़ता हुआ नज़र आ रहा है.जनगणना और अर्धकुंभ के चलते चुनाव समय से पहले होने के कयास लग रहे हैं.यदि ऐसा होता है तो ऐसे में राजनीतिक दलों के पास तैयारी के लिए बहुत कम समय बचा है.हर बार की तरह मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच देखा जा रहा है. सुर्खियों में चल रही समय से पहले चुनाव होने की खबर पर भाजपा के नेताओं का दावा है, कि पार्टी हमेशा चुनावी मूड में रहती है. जिसके चलते चुनाव पहले हों या समय पर जनता का विश्वास भाजपा के साथ है. जिसका असर 2027 में अपने आप दिख जायेगा. दूसरी तरफ कांग्रेस मिशन 2027 में जुटी है, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की नियुक्ति के सात महीने बाद भी अभी तक नई कार्यकारिणी नहीं बन पाई जिसके कारण कांग्रेस के लिए अटकले पैदा होती भी नज़र आ रही हैं,और भाजपा इसे कांग्रेस की गुटबाजी का नतीजा बता रही है. भाजपा का तंज है कि कार्यकारिणी न बनने से कांग्रेस का मिशन 2027 में जीत का सपना, सपना ही रह जाएगा. वही इन अड़चनों को दूर करने के लिए कई बार देवभूमि पधारी कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा दो दिवसीय दौरे पर एक बार फिर उत्तराखंड पधारी. दौरे के पहले दिन प्रभारी ने संगठन मजबूती के लिए अहम बैठक की और कार्यकर्ताओं को मूल मंत्र प्रदान किया. प्रभारी के दौरा कई नये बदलाव की ओर इशारा कर रहा था, और दूसरे दिन का दौरा चुनावी मंथन को लेकर किया जाना था, लेकिन दो दिन का उनका यह दौरा एक ही दिन का रहा जब दौरे के पहले दिन की रात ही कुमारी शैलजा को वापिस लौट गयी, उनके इस प्रकार वापस लौटने के बाद एक बार फिर कांग्रेस के लिए चुनौती बनती दिखाई दे रही है. क्योंकि उनके इस दौरे से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखने को मिला था, वही अब भाजपा शैलजा के इस एक दिवसीय दौरे पर भी तंज कस रही है. जिसके चलते राजनितिक गलियारों में आपसी बयानबाज़ी का दौर भी शुरु हो गया है.
उत्तराखंड की सियासत इन दिनों समय से पहले विधानसभा चुनाव की चर्चाओं से गरमाई हुई है. मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल मार्च 2027 तक है, लेकिन जनवरी 2027 में प्रस्तावित हरिद्वार कुंभ और उसके बाद होने वाली जनगणना को देखते हुए चुनावी टाइमलाइन को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर शुरू हो गया है. हालांकि, अभी तक चुनाव आयोग की ओर से कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिले हैं,लेकिन प्रदेश में तेजी से बदल रहे राजनीतिक घटनाक्रम इन चर्चाओं को लगातार हवा दे रहे हैं. बीजेपी भी इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है. पार्टी नेताओं का कहना है कि बीजेपी हमेशा चुनावी मोड में रहती है. दूसरी ओर कांग्रेस इन अटकलों को लेकर पूरी तरह बेफिक्र नजर आ रही है. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि चुनाव कब होंगे, इससे पार्टी को कोई फर्क नहीं पड़ता.वही कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी का दौरा कही न कही बड़े चुनावी समीकरणों और संगठन में बड़े बदलाव की ओर इशारा करता नजर आ रहा है.
वहीं, संगठनात्मक स्तर पर कांग्रेस खुद को बीजेपी से ज्यादा मजबूत बता रही है. इसके अलावा हाल में ही बीजेपी की ओर से विपक्ष नेता राहुल गांधी के दौरों को लेकर किए जा रहे राजनीतिक हमलों पर भी बयानबाजी तेज है.फिलहाल,उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव समय से पहले होंगे या तय समय पर, इसका फैसला भविष्य में चुनाव आयोग और परिस्थितियां तय करेंगी, लेकिन इतना जरूर है, कि इन चर्चाओं ने उत्तराखंड की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है. और अब सभी की नजर आने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिकी हुई है.