KNEWS DESK- देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट से एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक अपडेट सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी ‘लैंगिक संवेदीकरण और आंतरिक शिकायत समिति’ (GSICC) का पुनर्गठन कर दिया है। यह समिति अदालत परिसर में महिलाओं की सुरक्षा, कार्यस्थल पर समानता और लैंगिक संवेदनशीलता को सुनिश्चित करने के लिए काम करती है।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत के निर्देश पर इस समिति को नया स्वरूप दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट प्रशासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार, इस 12 सदस्यीय नई समिति की अध्यक्षता अब वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस बीवी नागरत्ना करेंगी।
यह समिति सुप्रीम कोर्ट में महिलाओं के लैंगिक संवेदीकरण और यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) विनियम, 2013 के तहत कार्य करती है और इसके दायित्वों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए इसका पुनर्गठन किया गया है।
नई समिति में न्यायपालिका, बार और कानूनी क्षेत्र से जुड़े कई प्रतिष्ठित सदस्यों को शामिल किया गया है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस नोंगमीकापम कोटिश्वर सिंह और रजिस्ट्रार कावेरी को भी जगह दी गई है।
इसके अलावा वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी और लिज मैथ्यू भी इस पैनल का हिस्सा बनी हैं। वकालत के क्षेत्र से अन्य सदस्यों में अधिवक्ता नीना गुप्ता, सौम्यजीत पाणि, साक्षी बंगा, प्रभा स्वामी और माहेरविश रीन को शामिल किया गया है।
समिति में सुप्रीम कोर्ट बार क्लर्क्स एसोसिएशन की प्रतिनिधि सुषमा रावत और ‘विविधता कंसल्टिंग’ की संस्थापक स्नेह शर्मा को भी जगह दी गई है, जिससे इसमें विविधता और व्यापक दृष्टिकोण को सुनिश्चित किया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट का यह कदम न्यायिक संस्थानों में सुरक्षित, समावेशी और संवेदनशील कार्य वातावरण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।