Knews Desk- देशभर में कैंसर मरीजों को लंबे समय से जरूरी दवाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा था। अब केंद्र सरकार ने इस समस्या को दूर करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने दो महत्वपूर्ण कैंसर रोधी दवाओं सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन की कीमत सीमा में 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की मंजूरी दी है, ताकि इनकी आपूर्ति सुचारु बनी रहे और मरीजों को दवाओं की कमी का सामना न करना पड़े।
ये दोनों दवाएं फेफड़े, अंडाशय, मूत्राशय और अन्य कई प्रकार के कैंसर के इलाज में व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाती हैं। पिछले कुछ महीनों से देश के कई अस्पतालों, विशेषकर सरकारी अस्पतालों में इन दवाओं की कमी की शिकायतें सामने आ रही थीं। इस संकट की मुख्य वजह प्लैटिनम धातु की बढ़ती कीमतें हैं। सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन के निर्माण में प्लैटिनम का उपयोग होता है, जिसकी वैश्विक कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। बढ़ती लागत के कारण कई दवा कंपनियों ने उत्पादन कम कर दिया था, जिससे बाजार में आपूर्ति प्रभावित हुई।
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने सार्वजनिक हित को देखते हुए इन दवाओं की अधिकतम कीमतों में एकमुश्त बढ़ोतरी की है। सरकार का मानना है कि इससे दवा कंपनियों को उत्पादन जारी रखने में मदद मिलेगी और मरीजों तक जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
हालांकि कीमतों में वृद्धि से इलाज की लागत कुछ बढ़ सकती है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि दवाओं की उपलब्धता बनाए रखना अधिक जरूरी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला अस्थायी है और छह महीने बाद इसकी समीक्षा की जाएगी। इस फैसले से देशभर के लाखों कैंसर मरीजों और उनके परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो पिछले कुछ समय से इन जरूरी दवाओं की कमी से जूझ रहे थे।