8 महीने से मानदेय न मिलने पर भड़के APO ने ब्लॉक परिसर में ही पेड़ से फंदा लगाकर दी जान देने की कोशिश

डिजिटल डेस्क- बदायूं जिले से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली और बेहद सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां के बिसौली विकास खंड (ब्लॉक) परिसर में उस समय हड़कंप मच गया और चीख-पुकार मच गई, जब एक अतिरिक्त मनरेगा अधिकारी (APO) ने भीषण आर्थिक तंगी से तंग आकर दिन-दहाड़े पेड़ से रस्सी बांधकर फांसी लगाने की कोशिश की। दफ्तर के ठीक सामने अधिकारी को फंदे पर लटकता देख वहां मौजूद भीड़ के हाथ-पांव फूल गए। लोगों ने बेहद मुस्तैदी दिखाते हुए आनन-फानन में दौड़कर रस्सी काटी और अधिकारी को वमुश्किल नीचे उतारा, जिससे उनकी जान बाल-बाल बच गई।

8 महीने से रुका था पैसा, दाने-दाने को मोहताज हुआ अधिकारी

आर्थिक तंगी और मानसिक प्रताड़ना के इस खौफनाक मामले के केंद्र में बिसौली ब्लॉक के अतिरिक्त मनरेगा अधिकारी त्रिवेणी शाक्य हैं। पीड़ित अधिकारी का आरोप है कि उन्हें पिछले 8 महीनों से एक भी रुपये का मानदेय (सैलरी) नहीं दिया गया है। लंबे समय से वेतन न मिलने के कारण उनका परिवार गंभीर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा था और वे दाने-दाने को मोहताज हो चुके थे। इसी मानसिक तनाव और बेबसी में आकर उन्होंने आज ब्लॉक परिसर को ही अपनी जीवनलीला समाप्त करने का जरिया चुन लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अगर मौके पर मौजूद जनता और कर्मचारियों ने सूझबूझ न दिखाई होती, तो ब्लॉक परिसर के भीतर ही एक सरकारी अधिकारी की लाश लटकती मिलती।

बीडीओ और अकाउंटेंट पर गंभीर आरोप: ’15 दिन से लगातार कर रहे थे प्रताड़ित’

फांसी के फंदे से सुरक्षित उतारे जाने के बाद पीड़ित एपीओ त्रिवेणी शाक्य ने रोते हुए ब्लॉक के आला अधिकारियों के खिलाफ बेहद संगीन और चौंकाने वाले आरोप लगाए। उन्होंने बिसौली के खंड विकास अधिकारी (BDO) राकेश कुमार निराला और वरिष्ठ सहायक/अकाउंटेंट संजीव कुमार मीणा पर सीधा निशाना साधा। पीड़ित का आरोप है कि बीते दो महीने पहले उनका ट्रांसफर म्याऊं ब्लॉक के लिए हो चुका है, लेकिन उनका 8 महीने का पुराना बकाया अभी भी बिसौली ब्लॉक में अटका है। त्रिवेणी शाक्य ने आरोप लगाया कि पिछले 15 दिनों से अकाउंटेंट संजीव मीणा और बीडीओ मिलकर उन्हें भुगतान के नाम पर लगातार दौड़ा रहे थे और मानसिक रूप से टॉर्चर कर रहे थे। इस पूरे मामले का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि विभाग के पास बजट की कोई कमी नहीं थी। एपीओ का मानदेय ‘मनरेगा कंटन्जेन्सी’ की धनराशि से जारी किया जाता है और यह पैसा ब्लॉक के खाते में पूरी तरह उपलब्ध था। नियमों के मुताबिक, यदि इस धनराशि का समय पर भुगतान नहीं किया जाता, तो यह बजट वापस विभाग को सरेंडर (लैप्स) हो जाता है। आरोप है कि वरिष्ठ सहायक संजीव मीणा जानबूझकर लापरवाही बरत रहे थे ताकि समय निकलने पर पैसा वापस चला जाए और पीड़ित को परेशान किया जा सके।

बीडीओ की सफाई: ‘अकाउंटेंट पर दो ब्लॉकों का चार्ज, इसलिए हुई देरी’

इस सनसनीखेज आत्मघाती कदम के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा हुआ है। मामले पर सफाई देते हुए खंड विकास अधिकारी (BDO) राकेश कुमार निराला का बयान भी सामने आया है। बीडीओ ने सीधे तौर पर किसी भी प्रताड़ना के आरोपों से इनकार किया है। बीडीओ ने दलील दी है कि वरिष्ठ सहायक/अकाउंटेंट के पास इस समय दो अलग-अलग ब्लॉकों का अतिरिक्त कार्यभार (चार्ज) है, जिसके कारण कागजी कार्रवाई और फाइलों को आगे बढ़ाने में देरी हुई है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि पीड़ित एपीओ त्रिवेणी शाक्य का जितना भी रुका हुआ मानदेय है, उसका भुगतान हर हाल में अगले एक से दो दिनों के भीतर सीधे उनके खाते में करा दिया जाएगा। फिलहाल इस हाई-प्रोफाइल ड्रामे के बाद बिसौली ब्लॉक में तनाव का माहौल है।

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