Knews Desk- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए अवैध हिरासत को नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है। अदालत ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को 24 घंटे से अधिक समय तक पुलिस हिरासत में रखना और उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश न करना कानून के खिलाफ है। इसी मामले में कोर्ट ने पीड़ित व्यक्ति को 25 हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश भी दिया है।
मामला प्रयागराज के एक निवासी से जुड़ा है, जिसे घरेलू विवाद के एक प्रकरण में पुलिस ने हिरासत में लिया था। आरोप है कि उसे तय कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना 24 घंटे से अधिक समय तक पुलिस लॉकअप में रखा गया। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर सीधा हमला माना।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पुलिस अक्सर यह मान लेती है कि उसके द्वारा किए गए अधिकारों के उल्लंघन पर किसी का ध्यान नहीं जाएगा, लेकिन कानून के शासन में ऐसी मनमानी स्वीकार नहीं की जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान के तहत प्रत्येक नागरिक को व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है और पुलिस को उसका सम्मान करना होगा।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि पीड़ित को 25 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाए। साथ ही अदालत ने यह भी संकेत दिया कि ऐसे मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला नागरिक अधिकारों की रक्षा और पुलिस जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाएगा। कोर्ट की सख्त टिप्पणी को पुलिस तंत्र के लिए एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।