NEET पेपर लीक पर बड़ा एक्शन! NTA तैयार कर रहा नया सिस्टम, अब हजारों सवालों के बैंक से बनेगा प्रश्नपत्र

KNEWS DESK- मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET में पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) अब ऐसा नया मॉडल तैयार कर रही है, जिससे भविष्य में प्रश्नपत्र लीक होने की संभावना को लगभग खत्म किया जा सके। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया को पहले से कहीं अधिक गोपनीय और सुरक्षित बनाया जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक, NTA अगले वर्ष से प्रश्नपत्र निर्माण की पूरी प्रक्रिया में बदलाव करने पर विचार कर रहा है। नए सिस्टम में विषय विशेषज्ञों को यह जानकारी नहीं होगी कि वे जिन प्रश्नों को तैयार कर रहे हैं, उनका उपयोग किस परीक्षा में किया जाएगा। यानी प्रश्न बनाने वाले विशेषज्ञ यह नहीं जान पाएंगे कि उनके सवाल NEET, JEE या किसी अन्य राष्ट्रीय परीक्षा के लिए इस्तेमाल होंगे।

प्रस्ताव के अनुसार, विभिन्न विषयों के हजारों प्रश्नों का एक केंद्रीय डेटाबेस तैयार किया जाएगा। विशेषज्ञ केवल प्रश्न तैयार करेंगे और उन्हें इस बड़े प्रश्न बैंक में जोड़ दिया जाएगा। बाद में इसी डेटाबेस से तकनीकी प्रक्रिया के माध्यम से अंतिम प्रश्नपत्र तैयार किया जाएगा। इससे प्रश्नपत्र की जानकारी बेहद सीमित लोगों तक ही पहुंच पाएगी और लीक की आशंका काफी कम हो जाएगी।

यह कदम हाल ही में सामने आए NEET पेपर लीक मामले की जांच के बाद उठाया जा रहा है। जांच एजेंसियों द्वारा कई लोगों की गिरफ्तारी के बाद परीक्षा सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। माना जा रहा है कि प्रश्नपत्र निर्माण प्रक्रिया के शुरुआती चरण में ही गोपनीयता से समझौता हुआ था, जिसके चलते सिस्टम में व्यापक सुधार की जरूरत महसूस की गई।

सरकारी अधिकारियों का मानना है कि समस्या केवल पेपर या परीक्षा पद्धति की नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया की संरचना से जुड़ी हुई है। इसलिए नई व्यवस्था में मानवीय हस्तक्षेप को न्यूनतम करने और तकनीकी निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। उद्देश्य ऐसा सिस्टम विकसित करना है जिसमें किसी एक व्यक्ति या समूह के पास पूरी जानकारी न हो।

अधिकारियों के अनुसार, भविष्य में 10,000 या उससे अधिक प्रश्नों का विशाल बैंक तैयार किया जा सकता है। परीक्षा के समय इसी बैंक से यादृच्छिक (रैंडम) तरीके से प्रश्न चुने जाएंगे। इससे अंतिम प्रश्नपत्र की जानकारी पहले से प्राप्त करना लगभग असंभव हो जाएगा।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो देश की प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को मजबूत करने में बड़ी मदद मिल सकती है। अब इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय सरकार और संबंधित संस्थाओं की मंजूरी के बाद लिया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *