Knews Desk- बिहार के वैशाली जिले से सामने आए एक मामले ने न्याय व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया की लंबी अवधि को लेकर नई बहस छेड़ दी है। 35 साल पुराने एक आपराधिक मामले में 85 वर्षीय बुजुर्ग दीपा राय को अदालत ने तीन साल की सजा सुनाई, जिसके बाद उनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। बुजुर्ग को सहारा देकर अदालत ले जाते हुए दिखाने वाले इस वीडियो ने देशभर का ध्यान अपनी ओर खींचा।

वैशाली के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने वर्ष 1992 के एक मामले में फैसला सुनाते हुए दीपा राय को आर्म्स एक्ट के तहत दोषी करार दिया। अदालत ने उन्हें तीन साल की सजा सुनाई, जबकि इसी मामले में अन्य चार दोषियों को 10-10 वर्ष की कैद और 25-25 हजार रुपये के जुर्माने की सजा दी गई। मामला 1992 में हुई एक हिंसक घटना से जुड़ा है। आरोप था कि दीपा राय समेत कई लोगों ने एक दंपति पर हमला किया था और फायरिंग की थी। इस घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया और 1993 में चार्जशीट दाखिल की गई। हालांकि, मुकदमे की सुनवाई पूरी होने और फैसला आने में तीन दशक से अधिक समय लग गया।

फैसले के बाद जब बुजुर्ग दीपा राय को कोर्ट लाया गया तो उनकी शारीरिक स्थिति देखकर लोग भावुक हो गए। वायरल वीडियो में वह अपने पैरों पर ठीक से चलने में असमर्थ दिखाई दिए और परिजन उन्हें सहारा देकर अदालत तक ले गए। यही वीडियो बाद में देशभर में चर्चा का विषय बन गया।
सूत्रों के अनुसार, वीडियो की जानकारी भारत के मुख्य न्यायाधीश तक भी पहुंची। बताया जाता है कि उन्होंने मामले की जानकारी लेने के लिए तत्काल कदम उठाए और संबंधित रिपोर्ट मंगवाई। बाद में पता चला कि बुजुर्ग को उनकी उम्र और परिस्थितियों को देखते हुए अंतरिम जमानत मिल चुकी है, जिससे वह उच्च न्यायालय में अपील कर सकते हैं। इसके बाद तत्काल सुनवाई की आवश्यकता नहीं रही। यह मामला एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि न्याय मिलने में अत्यधिक देरी का असर न केवल पीड़ितों पर बल्कि आरोपियों और उनके परिवारों पर भी पड़ता है।