KNEW DESK- देश में महिलाओं और छात्राओं के स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने की दिशा में केरल सरकार एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। राज्य सरकार स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं को हर महीने तीन दिन की पीरियड लीव देने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। यदि यह योजना लागू होती है, तो छात्राओं को मासिक धर्म के दौरान शारीरिक और मानसिक राहत मिल सकेगी।

सरकार का मानना है कि कई छात्राएं पीरियड्स के दौरान दर्द, थकान, कमजोरी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण नियमित रूप से स्कूल नहीं जा पाती हैं। ऐसे में उन्हें विशेष अवकाश देने से उनकी सेहत और पढ़ाई दोनों पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
पढ़ाई पर नहीं पड़ेगा असर
प्रस्ताव के अनुसार, जिन छात्राओं को पीरियड लीव मिलेगी, उनके लिए अतिरिक्त कक्षाओं की व्यवस्था भी की जा सकती है ताकि पढ़ाई में किसी तरह का नुकसान न हो। शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश तैयार करने पर काम कर रहे हैं।
केरल पहले ही विश्वविद्यालय और कॉलेज स्तर पर छात्राओं को पीरियड लीव की सुविधा दे चुका है। अब इसी मॉडल को स्कूल स्तर तक विस्तारित करने की तैयारी की जा रही है।
महिलाओं के लिए और भी कई योजनाएं
राज्य सरकार महिलाओं को अधिक सुविधाएं देने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके तहत कार्यस्थलों पर समान वेतन सुनिश्चित करने, निजी संस्थानों और आईटी पार्कों में क्रेच एवं डे-केयर सेंटर की व्यवस्था को मजबूत करने और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं को मातृत्व लाभ देने की योजना बनाई जा रही है।
इसके अलावा प्रमुख शहरों में महिलाओं के लिए बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं और सुरक्षित बुनियादी ढांचा विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
महिलाओं के अनुकूल राज्य बनने की दिशा में कदम
सरकार का लक्ष्य महिलाओं और छात्राओं के लिए अधिक सुरक्षित, सम्मानजनक और सुविधाजनक माहौल तैयार करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो यह छात्राओं के स्वास्थ्य और शिक्षा के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है।