कर्नाटक की राजनीति में सक्रिय रहेंगे सिद्धारमैया, राज्यसभा जाने से किया इनकार

KNEWS DESK- कर्नाटक की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का प्रभाव अभी भी बरकरार दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने साफ कर दिया है कि फिलहाल उनकी राष्ट्रीय राजनीति में कोई रुचि नहीं है और वे राज्य की राजनीति में ही सक्रिय भूमिका निभाते रहेंगे। इसी के साथ उन्होंने कांग्रेस आलाकमान द्वारा दिए गए राज्यसभा सीट के प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया है।

मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद सिद्धारमैया गुरुवार देर रात दिल्ली पहुंचे, जहां उनकी कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात होने की संभावना है। हालांकि दिल्ली पहुंचने पर राज्यसभा सीट के प्रस्ताव को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और आगे बढ़ गए।

इससे पहले बेंगलुरु में मीडिया से बातचीत करते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें राज्यसभा जाने का सुझाव दिया था, लेकिन उन्होंने विनम्रता के साथ इसे अस्वीकार कर दिया। उन्होंने कहा कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान कर्नाटक की राजनीति और जनता की सेवा पर केंद्रित है।

सिद्धारमैया ने यह भी स्पष्ट किया कि वह वरुणा विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने रहेंगे और अपने कार्यकाल के बाकी बचे दो वर्षों तक जनता के लिए काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा, “लोगों ने मुझे पांच साल के लिए चुना है। मैं राज्य और अपने क्षेत्र के लोगों के लिए लगातार काम करता रहूंगा।”

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बावजूद कांग्रेस संगठन और कर्नाटक की राजनीति में सिद्धारमैया का प्रभाव बना रहेगा। उनके इस्तीफे के बाद राज्य कांग्रेस में सत्ता संतुलन और नेतृत्व को लेकर नई राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

अपने इस्तीफे पर सफाई देते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि उन्होंने हमेशा पार्टी नेतृत्व के फैसले का सम्मान किया है। उन्होंने कहा, “जब पार्टी नेतृत्व ने मुझसे इस्तीफा देने को कहा, तो मैंने तुरंत स्वेच्छा से इस्तीफा दे दिया। इसमें किसी तरह का दबाव नहीं था।”

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह आगे भी राजनीति में सक्रिय रहेंगे और सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।

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