Knews Desk- दिल्ली के लाल किला कार ब्लास्ट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, मुख्य आरोपी डॉ. उमर-उन-नबी ने विस्फोटक सामग्री जुटाने के लिए फर्जी पहचान का इस्तेमाल किया था। उसने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर नकली नाम और मोबाइल नंबर के जरिए केमिकल्स और खास उपकरण खरीदे, ताकि किसी को उस पर शक न हो।

NIA के अनुसार, उमर-उन-नबी ने हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह इलाके में अपने फ्लैट को मिनी लैब में बदल दिया था। यहां वह कई महीनों तक विस्फोटक तैयार करने से जुड़े प्रयोग करता रहा। जांच में पता चला कि उसने इंटरनेट और ऑफलाइन स्रोतों से बम बनाने की जानकारी जुटाई थी। फ्लैट में इलेक्ट्रोलिसिस तकनीक के जरिए क्लोरेट और परक्लोरेट जैसे विस्फोटक पदार्थ तैयार करने की कोशिश की जा रही थी।

जांच एजेंसियों को मुंबई के एक व्यापारी से जुड़ा डिलीवरी चालान भी मिला है, जिसमें विशेष इलेक्ट्रोड और अन्य उपकरण खरीदे जाने का रिकॉर्ड मौजूद है। बताया जा रहा है कि आरोपी ने “राहुल भट्ट” नाम की फर्जी पहचान बनाकर इंडिया मार्ट जैसे प्लेटफॉर्म से सामान मंगवाया था। भुगतान डिजिटल माध्यम से किया गया और सामान यूनिवर्सिटी के बाहर डिलीवर कराया गया।
10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास हुए इस भीषण कार ब्लास्ट में कई लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य घायल हो गए थे। शुरुआती जांच में इसे आतंकी हमला माना गया था। NIA ने इस मामले में करीब 7,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें कई आरोपियों और उनके नेटवर्क का जिक्र किया गया है। एजेंसी अब इस पूरे मॉड्यूल के विदेशी कनेक्शन और फंडिंग की भी जांच कर रही है।