KNEWS DESK – आज पूरे देश में गंगा दशहरा का पावन पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। सुबह से ही Haridwar, Varanasi और Prayagraj समेत कई गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। कहा जाता है कि गंगा दशहरा पर स्नान, दान और पूजा करने से व्यक्ति के दस प्रकार के पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-शांति आती है।

गंगा स्नान और दान का शुभ समय
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गंगा दशहरा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना बेहद शुभ माना गया है। अगर सुबह स्नान संभव न हो, तो दोपहर 12 बजकर 17 मिनट से 1 बजकर 10 मिनट तक का समय भी स्नान और दान के लिए उत्तम माना जा रहा है।
मान्यता है कि आज के दिन गंगा नदी में डुबकी लगाने से मानसिक शांति मिलती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। जो लोग गंगा घाट तक नहीं पहुंच सकते, वे घर में स्नान के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं।
घर पर ऐसे करें मां गंगा की आसान पूजा
गंगा दशहरा की पूजा बेहद सरल मानी जाती है। श्रद्धा और सच्चे मन से की गई आराधना मां गंगा को प्रिय होती है।

पूजा विधि:
- पूजा स्थान को साफ करके मां गंगा की तस्वीर या जल से भरा कलश स्थापित करें।
- मां गंगा को फूल, अक्षत, धूप, दीप और सफेद मिठाई अर्पित करें।
- “ॐ श्री गंगायै नमः” और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
- अंत में मां गंगा की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
गंगा दशहरा पर क्या दान करना शुभ माना जाता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गंगा दशहरा पर दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। इस दिन जल से भरा घड़ा, छाता, फल, वस्त्र, अनाज और भोजन दान करना शुभ माना जाता है। जरूरतमंदों की सहायता करने और पक्षियों को दाना डालने से भी पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
क्या है गंगा दशहरा का धार्मिक महत्व?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुईं। तभी से गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता है।
सनातन धर्म में मां गंगा को मोक्षदायिनी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से मां गंगा की पूजा करने से घर में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।