Knews Desk- अमेरिका एक तरफ रूस और ईरान से जुड़े तेल कारोबार पर लगातार नजर बनाए हुए है, वहीं दूसरी तरफ भारत के साथ ऊर्जा व्यापार को और मजबूत करने की कोशिश भी तेज कर दी गई है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और तेल सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच अमेरिका अब भारत को एक बड़े ऊर्जा साझेदार के रूप में देख रहा है।
हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio की भारत यात्रा के दौरान ऊर्जा सहयोग बड़ा मुद्दा रहा। अमेरिका चाहता है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अमेरिकी तेल और गैस आयात बढ़ाए। खासतौर पर रूस और ईरान से तेल खरीद को लेकर अमेरिका सतर्क नजर आ रहा है। दरअसल, यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में सस्ता कच्चा तेल खरीदना शुरू किया था। इससे भारत को राहत मिली, लेकिन अमेरिका लगातार चाहता रहा है कि भारत रूस पर अपनी निर्भरता कम करे। हालांकि भारत साफ कह चुका है कि उसकी पहली प्राथमिकता देश की ऊर्जा सुरक्षा है। भारतीय अधिकारियों ने दो टूक कहा है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार तेल खरीदेगा।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अस्थिरता ने भी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है। ऐसे में अमेरिका भारत के साथ ऊर्जा व्यापार बढ़ाकर एशिया में अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत करना चाहता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका भारत को भरोसेमंद ऊर्जा सप्लायर के तौर पर अपने साथ जोड़ना चाहता है। इसमें LNG, कच्चा तेल और स्वच्छ ऊर्जा सेक्टर में निवेश जैसे मुद्दे शामिल हैं। वहीं भारत भी अलग-अलग देशों से तेल खरीदकर सप्लाई को विविध बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भारत, अमेरिका, रूस और ईरान के बीच ऊर्जा कूटनीति वैश्विक राजनीति का बड़ा केंद्र बन सकती है। भारत फिलहाल संतुलन बनाकर चलने की कोशिश कर रहा है ताकि ऊर्जा जरूरतें भी पूरी हों और अंतरराष्ट्रीय रिश्तों पर भी असर न पड़े।