KNEWS DESK- PM मोदी की अध्यक्षता में हुई एक लंबी कैबिनेट बैठक ने देश की रणनीतिक दिशा और नीतिगत प्राथमिकताओं को लेकर कई अहम संकेत दिए। लगभग 3 से 4 घंटे चली इस मैराथन मीटिंग में पश्चिम एशिया में जारी तनाव, ऊर्जा संकट और भारत के ‘विकसित भारत 2047’ विज़न पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक का बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और संभावित आपूर्ति बाधाओं पर केंद्रित रहा। ईरान में चल रहे संघर्ष और Strait of Hormuz में संभावित अवरोध को देखते हुए सरकार ने ऊर्जा आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोतों को मजबूत करने की रणनीति पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने मंत्रियों को निर्देश दिया कि देश की ऊर्जा सुरक्षा को हर परिस्थिति में सुनिश्चित किया जाए और किसी भी वैश्विक संकट का असर आम जनता पर न्यूनतम हो।
बैठक में 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य पर भी गहन चर्चा हुई। पीएम मोदी ने कहा कि सरकार का फोकस केवल मौजूदा कार्यों पर नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूत सुधारों की नींव रखने पर होना चाहिए। मंत्रियों को निर्देश दिया गया कि सभी नीतियों और योजनाओं का उद्देश्य नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार होना चाहिए।
पश्चिम एशिया संकट के बीच पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति को लेकर उठाए गए कदमों की समीक्षा की गई। सरकार ने दावा किया कि वैश्विक दबावों के बावजूद देश में ईंधन आपूर्ति स्थिर बनी हुई है और कीमतों में संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है।
बैठक में S. Jaishankar ने प्रधानमंत्री की हालिया विदेश यात्राओं पर प्रस्तुति दी। इसके अलावा विभिन्न मंत्रालयों के सचिवों ने अपने-अपने विभागों की प्रगति और सुधार योजनाओं की जानकारी साझा की। कैबिनेट सचिव ने भी प्रशासनिक सुधारों और सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन पर विस्तृत रिपोर्ट पेश की।
यह बैठक केवल एक प्रशासनिक समीक्षा नहीं थी, बल्कि भारत की दीर्घकालिक रणनीति, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक चुनौतियों से निपटने की तैयारी का संकेत भी देती है। सरकार अब स्पष्ट रूप से 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखकर नीतिगत फैसलों को आगे बढ़ा रही है।