रविवार को थम सकती हैं Ola-Uber और Zomato-Swiggy की सेवाएं, Gig Workers की हड़ताल से मचेगी परेशानी

देशभर में रविवार को गिग वर्कर्स की हड़ताल का बड़ा असर देखने को मिल सकता है. ऐप आधारित टैक्सी और डिलीवरी सेवाओं से जुड़े लाखों कर्मचारी 17 मई को दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक काम बंद रखने जा रहे हैं. इस हड़ताल का असर Ola, Uber, Rapido, Swiggy, Zomato, Zepto, Blinkit, Amazon India, Flipkart, Meesho और Myntra जैसी सेवाओं पर पड़ सकता है.

गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) ने इस हड़ताल का ऐलान किया है. यूनियन का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद डिलीवरी बॉय और कैब ड्राइवरों की कमाई पर सीधा असर पड़ा है. उनका आरोप है कि ईंधन, वाहन रखरखाव और अन्य खर्च तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन कंपनियों की ओर से मिलने वाला भुगतान उसी अनुपात में नहीं बढ़ाया जा रहा.

यूनियन की अध्यक्ष सीमा सिंह ने मांग की है कि डिलीवरी और कैब सर्विस से जुड़े कर्मचारियों के लिए न्यूनतम 20 रुपये प्रति किलोमीटर की दर तय की जाए. उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई और भीषण गर्मी के बीच गिग वर्कर्स आर्थिक दबाव झेल रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, हड़ताल के दौरान फूड डिलीवरी, क्विक कॉमर्स और ई-कॉमर्स सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं. ग्राहकों को ऑर्डर में देरी, कैंसिलेशन और सर्ज प्राइसिंग जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. खासतौर पर बड़े शहरों और टियर-2 शहरों में असर ज्यादा देखने की आशंका जताई जा रही है.

गिग वर्कर्स का कहना है कि लगातार बढ़ते काम के दबाव, घटती कमाई और नौकरी की सुरक्षा की कमी ने उनकी परेशानियां बढ़ा दी हैं. इससे पहले भी दिसंबर 2025 में गिग वर्कर्स ने देशव्यापी हड़ताल की थी, जिसमें “10 मिनट डिलीवरी मॉडल” का विरोध किया गया था. यूनियनों का आरोप है कि तेज डिलीवरी के दबाव के कारण सड़क हादसों का खतरा बढ़ रहा है.

नीति आयोग के अनुमान के मुताबिक, भारत में गिग वर्कर्स की संख्या 2029-30 तक बढ़कर 2.3 करोड़ तक पहुंच सकती है. ऐसे में विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि समय रहते उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो देश की तेजी से बढ़ती गिग इकोनॉमी पर बड़ा असर पड़ सकता है.

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