डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश की राजनीति में मची हलचल के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। अमित शाह के आवास पर करीब एक घंटे तक चली इस उच्चस्तरीय मुलाकात ने राज्य के सियासी गलियारों में यह स्पष्ट कर दिया है कि बीजेपी अब पूरी तरह से ‘मिशन 2027’ के मोड में आ चुकी है। इस बैठक का मुख्य एजेंडा हाल ही में शपथ लेने वाले नए मंत्रियों को विभागों का आवंटन और आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति तय करना था।
विभागों के आवंटन पर सुलझा सस्पेंस
उत्तर प्रदेश में 10 मई को हुए मंत्रिमंडल विस्तार में छह नए चेहरों को जगह दी गई थी, जबकि दो राज्य मंत्रियों की पदोन्नति कर उन्हें कैबिनेट रैंक दी गई थी। विस्तार के चार दिन बीत जाने के बाद भी विभागों की घोषणा न होने से राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। सूत्रों के मुताबिक, शाह-योगी की इस बैठक में उन सभी संशयों पर विराम लग गया है। विभागों की फाइल पर अंतिम सहमति बन चुकी है और माना जा रहा है कि अगले 24 से 48 घंटों के भीतर राजभवन से आधिकारिक सूची जारी कर दी जाएगी।
सोशल इंजीनियरिंग और जातिगत समीकरणों पर जोर
उत्तर प्रदेश में इस बार विभागों का बंटवारा केवल प्रशासनिक सुगमता को ध्यान में रखकर नहीं किया गया है, बल्कि इसके पीछे गहरे सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों की एक सोची-समझी रणनीति काम कर रही है। भारतीय जनता पार्टी का मुख्य फोकस उन विशेष वर्गों और समुदायों को साधने पर है, जिन्होंने पिछले कुछ चुनावों में मिली-जुली प्रतिक्रिया दी थी। इसी रणनीति के तहत, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भूपेंद्र सिंह चौधरी के प्रभाव का उपयोग कर जाट समुदाय को एकजुट रखने और अपनी ओर मोड़ने की कोशिश की जा रही है। वहीं, समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए मनोज पांडेय को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपकर पार्टी ब्राह्मण मतदाताओं के बीच अपना विश्वास पुनः बहाल करने का ‘ब्राह्मण कार्ड’ खेल रही है। इसके अतिरिक्त, कृष्णा पासवान, सुरेंद्र दिलेर और कैलाश राजपूत जैसे नए चेहरों को आगे बढ़ाकर भाजपा दलित और पिछड़ा वर्ग के बीच अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है, ताकि ‘सबका साथ, सबका विकास’ के नारे को धरातल पर उतारकर मिशन-2027 के लिए एक अजेय सामाजिक गठबंधन तैयार किया जा सके।
2027 का रोडमैप… शाह-योगी की रणनीति
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक में अमित शाह और योगी आदित्यनाथ ने मंत्रियों को उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों के आधार पर विभाग सौंपने का निर्णय लिया है। रणनीति यह है कि नए मंत्री न केवल सरकारी योजनाओं को लागू करें, बल्कि अपने-अपने समुदायों और क्षेत्रों में भाजपा के ‘ब्रांड एंबेसडर’ के रूप में काम करें। 2027 के चुनाव से पहले संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बिठाने के लिए भी कुछ कड़े फैसले लिए जा सकते हैं।