KNEWS DESK- सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। जब प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ता है, तो उसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है। वर्ष 2026 में गुरु प्रदोष व्रत 14 मई, गुरुवार को रखा जाएगा। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा और व्रत करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
गुरु प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष काल भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। गुरु प्रदोष व्रत विशेष रूप से ज्ञान, धन, संतान सुख और वैवाहिक जीवन में खुशहाली प्रदान करने वाला माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि प्रदोष काल में देवता भी कैलाश पर्वत पर भगवान शिव की पूजा करते हैं। इस समय की गई आराधना कई गुना फलदायी मानी जाती है।
गुरु प्रदोष व्रत की पूजा विधि
गुरु प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ पीले या सफेद वस्त्र धारण करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें। घर के मंदिर या शिवालय में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें।
पूजा के दौरान शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद और बेलपत्र अर्पित करें। इसके बाद धूप, दीप और पुष्प चढ़ाएं। भगवान शिव के मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद का समय पूजा के लिए सबसे उत्तम माना गया है। इस दौरान शिव चालीसा और प्रदोष व्रत कथा का पाठ करना भी लाभकारी माना जाता है।
भगवान शिव को लगाएं ये विशेष भोग
खीर का भोग
भगवान शिव को खीर अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
पंचामृत अर्पित करें
दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बना पंचामृत भोलेनाथ को अत्यंत प्रिय माना जाता है। पूजा के बाद इसे प्रसाद के रूप में बांटना शुभ होता है।
मखाने और बताशे
गुरु प्रदोष व्रत पर मखाने और बताशे का भोग लगाने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और आर्थिक समस्याओं से राहत मिलती है।
भांग और धतूरा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव को भांग और धतूरा अर्पित करना विशेष फलदायी माना गया है।
फल और सफेद मिठाई
केला, नारियल, मौसमी फल और सफेद मिठाई का भोग लगाने से भी भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
गुरु प्रदोष व्रत से मिलने वाले लाभ
मान्यता है कि गुरु प्रदोष व्रत रखने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। यह व्रत करियर, व्यापार, शिक्षा और विवाह संबंधी परेशानियों में लाभकारी माना गया है। साथ ही भगवान शिव की कृपा से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गुरु प्रदोष व्रत करने से कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति मजबूत होती है। इससे व्यक्ति को ज्ञान, मान-सम्मान और आर्थिक उन्नति प्राप्त हो सकती है। इसलिए इस व्रत को अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है।