नीट पेपर लीक की इनसाइड स्टोरी: प्रिंटिंग प्रेस से लेकर व्हाट्सएप ग्रुप तक, जानें कैसे रचा गया ‘महा-घोटाले’ का चक्रव्यूह

शिव शंकर सविता- देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 के रद्द होने के पीछे किसी एक राज्य की चूक नहीं, बल्कि कई राज्यों में फैला एक संगठित नेटवर्क था। राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि नीट का पेपर प्रिंटिंग प्रेस में छपने से पहले ही लीक हो गया था। इस खुलासे के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने परीक्षा रद्द कर जांच सीबीआई को सौंप दी है।

केरल से राजस्थान: ऐसे शुरू हुआ खेल

जांच में सामने आया है कि इस पूरे घोटाले का मुख्य केंद्र बिंदु केरल और राजस्थान का कनेक्शन था। दरअसल, राजस्थान के चूरू जिले का एक युवक, जो केरल से एमबीबीएस कर रहा था, इस गिरोह की एक महत्वपूर्ण कड़ी बनकर उभरा। सूत्रों के अनुसार, इस युवक के पास सबसे पहले पेपर पहुंचा था। उसने यह पेपर सीकर में ‘एसके कंसल्टेंसी’ चलाने वाले राकेश मंडावरिया को भेजा। राकेश ने अप्रैल महीने में ही क्वेश्चन बैंक हासिल कर लिया था और इसे अपने पीजी (PG) में रहने वाले छात्रों को बांट दिया।

मास्टरमाइंड मनीष और प्रिंटिंग प्रेस का कनेक्शन

SOG की जांच में मनीष नाम का शख्स मास्टरमाइंड के रूप में सामने आया है, जिसे जयपुर से पकड़ा गया। मनीष के पास अपनी प्रिंटिंग प्रेस होने की भी सूचना है। दावा किया जा रहा है कि पेपर छपने से पहले ही मनीष ने बायोलॉजी के 90 और केमिस्ट्री के 35 सवालों को लीक कर दिया था। मनीष के गैंग ने इन असली सवालों में कुछ अन्य सवाल मिलाकर एक ‘क्वेश्चन बैंक’ तैयार किया और इसे टेलीग्राम व व्हाट्सएप के जरिए पूरे देश में फैला दिया।

पांच राज्यों में फैला नेटवर्क

पेपर लीक की यह आग केवल राजस्थान तक सीमित नहीं रही। मनीष और उसके साथियों ने इन पेपरों को महाराष्ट्र के नासिक, हरियाणा के कुछ सेंटर, उत्तराखंड और बिहार तक पहुंचाया।

  • महाराष्ट्र: नासिक में पेपर समय से पहले पहुंच चुका था।
  • हरियाणा: कई सेंटरों पर छात्रों के बीच प्रश्न पत्र वितरित किए गए।
  • बिहार: यहाँ भी कनेक्शन की पुष्टि हुई है, लेकिन मुख्य चेहरों की पहचान अभी गुप्त है।

ऐसे पकड़ा गया ‘मुख्य किरदार’

हैरानी की बात यह है कि नीट परीक्षा के बाद राकेश मंडावरिया ने खुद पुलिस में एक शिकायत दर्ज कराई थी। जब राजस्थान पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की कि उसे पेपर कहां से मिला, तो उसने चूरू के उस छात्र का नाम उगला जो केरल में था। वहां से जांच की सुई मनीष तक पहुंची और पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ हो गया। पूछताछ में छात्रों ने स्वीकार किया है कि उन्होंने इस लीक पेपर के बदले मोटी रकम दी थी। पुलिस अब मनीष, राकेश और अन्य संदिग्धों के बीच हुई व्हाट्सएप चैट और टेलीग्राम ग्रुप्स को खंगाल रही है। डिजिटल फुटप्रिंट्स के आधार पर अब सीबीआई इस मामले की तह तक जाकर दोषियों के खिलाफ शिकंजा कसेगी।

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