डिजिटल डेस्क- बिहार की राजधानी पटना को स्मार्ट और सुरक्षित बनाने की दिशा में पटना नगर निगम ने एक ऐतिहासिक और अत्यंत सराहनीय कदम उठाया है। अक्सर मॉनसून के दौरान सड़कों पर खुले या क्षतिग्रस्त मैनहोल जानलेवा साबित होते हैं, लेकिन अब इस समस्या का समाधान ‘मैनहोल एम्बुलेंस’ के रूप में सड़कों पर दौड़ता नजर आएगा। सामाजिक हित को सर्वोपरि रखते हुए शुरू की गई यह सेवा शहरवासियों के लिए किसी सुरक्षा कवच से कम नहीं है। पटना नगर निगम की यह ‘मैनहोल एम्बुलेंस’ दरअसल एक चलता-फिरता रिपेयरिंग यूनिट है। इसे पुराने वाहनों को नया रूप देकर तैयार किया गया है। इस एम्बुलेंस की सबसे खास बात यह है कि इसमें मरम्मत के लिए आवश्यक सभी संसाधन हर समय मौजूद रहते हैं। वाहन पर निर्माण सामग्री (सीमेंट, बालू), पहले से तैयार मैनहोल के ढक्कन, कुशल मिस्त्री, बिजली कर्मी और ड्राइवर की तैनाती की गई है। जैसे ही किसी क्षतिग्रस्त मैनहोल की सूचना मिलती है, यह एम्बुलेंस तुरंत मौके पर पहुँचती है और कम से कम समय में उसे दुरुस्त कर देती है।
एक कॉल पर होगा समाधान: हेल्पलाइन नंबर 155304
नगर निगम ने इस सेवा को पूरी तरह जनता के प्रति जवाबदेह बनाया है। यदि किसी नागरिक को सड़क पर कोई टूटा हुआ या बिना ढक्कन वाला मैनहोल दिखता है, तो वह तुरंत हेल्पलाइन नंबर 155304 पर इसकी शिकायत दर्ज करा सकता है। शिकायत मिलते ही मैनहोल एम्बुलेंस मौके पर रवाना हो जाएगी। वर्तमान में यह सेवा पटना के सभी छह जोन में सुचारू रूप से शुरू कर दी गई है, जिससे पूरे शहर को कवर किया जा सके।
प्रतिदिन 30-35 मैनहोल ठीक करने का लक्ष्य
नगर निगम प्रशासन ने इस सेवा के संचालन को लेकर कड़े निर्देश जारी किए हैं। समिति द्वारा यह सुनिश्चित किया गया है कि व्यवस्था इतनी चुस्त-दुरुस्त हो कि एक दिन में कम से कम 30 से 35 क्षतिग्रस्त मैनहोल को अनिवार्य रूप से ठीक किया जाए। कार्य में तेजी लाने के लिए संवेदकों (Contractors) को भी सूचीबद्ध किया जा रहा है, ताकि जनहित के इस कार्य में किसी भी प्रकार की देरी न हो।
सामाजिक सुरक्षा और जनहित में बड़ा कदम
यह पहल सामाजिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। अक्सर बारिश के दिनों में जलजमाव के कारण खुले मैनहोल दिखाई नहीं देते, जिससे राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों के साथ गंभीर दुर्घटनाएँ हो जाती हैं। मैनहोल एम्बुलेंस सेवा न केवल इन हादसों को रोकेगी, बल्कि शहर की ड्रेनेज व्यवस्था को भी बेहतर बनाएगी। पुराने वाहनों का पुन: उपयोग कर उन्हें सेवा में लगाना नगर निगम की दूरदर्शिता और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता को भी दर्शाता है।