उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड राज्य की सियासत में मुख्यमंत्री धामी ने अपने अब तक के कार्यकाल के दौरान कई ऐतिहासिक निर्णय लिए है, जिनकी न केवल प्रदेश में बल्कि देश विदेश में भी प्रशंसा की जा रही है. प्रदेश की स्वास्थ्य, रोजगार, कनेक्टिविटी, जल, जीवन और शिक्षा जैसे सभी क्षेत्रों में कार्य कर मुख्यमंत्री धामी ने विकसित उत्तराखंड के लक्ष्य के साथ चार साल बेमिसाल के रूप में अपने कार्यकाल को चिन्हित किया है. वही जहाँ एक ओर धामी सरकार के चार साल से अधिक कार्यकाल का समय बीतता जा रहा है, तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री धामी द्वारा ऐतिहासिक निर्णय लेने का सिलसिला भी गति से चल रहा है.आपको बता दे, की अब मदरसों में मिलने वाली शिक्षा के क्षेत्र में मुख्यमंत्री धामी द्वारा नया कार्य जल्द शुरु होने जा रहा है. मुख्यमंत्री धामी के निर्देशानुसार उत्तराखंड सरकार द्वारा उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को भंग कर उत्तराखंड अल्पसंख्यक एजुकेशन बोर्ड का गठन कर दिया है,जो इस वर्ष जुलाई माह से काम करना शुरू कर देगा. सरकार का मानना है कि इस कदम से अल्पसंख्यक शिक्षा को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ा जाएगा और गुणवत्ता में सुधार होगा, जिसके बाद सभी संचालित मदरसों में अनिवार्य रूप से उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा.साथ ही उत्तराखंड में हजारों वक्फ संपत्तियां सरकार की रडार पर आ गई हैं. धामी सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि जो संपत्तियां तय समय तक ‘उम्मीद पोर्टल’ पर दर्ज नहीं होंगी, उन्हें अवैध कब्जा मानते हुए सरकार अपने अधीन ले सकती है.वही मुख्यमंत्री धामी के इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति में विपक्ष अभी भी नाखुश नज़र आ रहा है, जहाँ एक ओर इस निर्णय को लेकर सत्ता पक्ष सरहाना कर रहा है, तो वही विपक्ष का आरोप है कि सरकार के पास प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों पर जनता को देने के लिए जवाब नहीं है, इसलिए केवल धार्मिक ध्रुवीकरण में वर्तमान सरकार पूरी ताकत लगाए हुए हैं, जिसके चलते अब मदरसा बोर्ड भंग करने का ऐलान कर रहे हैं. साथ ही वर्तमान में उत्तराखंड बोर्ड के अंतर्गत चल रहे राज्य के अन्य विद्यालयों की अवस्था ठीक न हो पाना, जर्जर स्कूल, स्कूलों में शिक्षकों का न हो पाना जैसे मुद्दों को लेकर भी विपक्ष सरकार पर हल्ला बोलता दिखाई दे रहा है. वही विपक्ष के आरोपों के बाद सत्ता पक्ष भी अपने अपने दावे देता नज़र आ रहा है, जिसके चलते आरोप और प्रत्यारोप का सिलसिला भी तेज़ होता दिखाई देने लगा है.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार ने एक और ऐतिहासिक निर्णय लिया है. स्वास्थ्य, रोजगार, कनेक्टिविटी, जल, शिक्षा और जीवन के हर क्षेत्र में ‘चार साल बेमिसाल’ का लक्ष्य लेकर चल रही धामी सरकार अब मदरसों की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रही है. मुख्यमंत्री धामी के निर्देश पर उत्तराखंड सरकार ने उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को भंग कर दिया है, इसकी जगह अब उत्तराखंड अल्पसंख्यक एजुकेशन बोर्ड का गठन किया गया है. नया बोर्ड इस वर्ष जुलाई माह से काम करना शुरू कर देगा. वही विपक्ष इस विषय पर अपनी नाराज़गी जााहिर करता दिखाई दे रहा है, विपक्ष का मानना है की आरएसएस के दबाव में और मुस्लिम विरोधी फैसले ले कर योगी आदित्यनाथ से आगे निकलने की होड़ में अब मदरसा बोर्ड भंग करने का निर्णय लिया गया है, साथ ही साथ ही विपक्ष का आरोप है कि उत्तराखंड की भाजपा सरकार के मदरसा बोर्ड भंग करने के निर्णय पर प्रदेश की जनता का मुख्य मुद्दों महंगाई, रसोई गैस की किल्लत, महिलाओं पर लगातार बढ़ रही हिंसा व अपराध, अवैध खनन, आबकारी घोटाला, स्मार्ट सिटी घोटाला, नकल और पेपर लीक तथा चरम पर बेरोजगारी जैसे ज्वलंत मुद्दों पर जनता को जवाब नहीं दे पा रहे इसलिए धार्मिक ध्रुवीकरण में पूरी ताकत लगाए हुए हैं और अब मदरसा बोर्ड भंग करने का ऐलान किया जा रहा है. तो वही सत्ता पक्ष विपक्ष के इस विरोध को राजनीति करने का आरोप लगाते हुए विपक्ष का विशेष वर्ग के लिए प्रेमी और संवेदनशील बताती नजर आ रही है.
मुख्यमंत्री धामी के मदरसा शिक्षा बोर्ड को खत्म करने के फैसले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है.उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा.साथ ही उत्तराखंड में हजारों वक्फ संपत्तियां सरकार की रडार पर आ गई हैं. धामी सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि जो संपत्तियां तय समय तक ‘उम्मीद पोर्टल’ पर दर्ज नहीं होंगी, उन्हें अवैध कब्जा मानते हुए सरकार अपने अधीन ले सकती है.शम्स ने कहा कि सीएम धामी सख्त है,और जल्द ही धामी सरकार का बुलडोजर अवैध कब्जेदारों पर गरजने भी वाला है।विपक्षी पार्टी के साथ कांग्रेस का कहना है कि चुनाव आने से पहले सरकार इस तरह के हथकंडे अपनाती है.
उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड का अस्तित्व इस साल ही समाप्त हो जाएगा. हालांकि, सरकार ने ये भी स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार का मकसद उत्तराखंड में अल्पसंख्यकों को अत्यधिक और स्मार्ट शिक्षा से जोड़ना है. फिर चाहे वो मुस्लिम हों या अन्य समुदाय के लोग हों.इस अधिनियम के बनते ही उत्तराखंड अन्य राज्यों से अलग अधिनियम बनाने वाला पहला राज्य भी बन जाएगा. इस विधेयक को बीते 17 अगस्त में कैबिनेट में लाया गया था. बैठक में इस विधेयक पर बकायदा चर्चा हुई और उसके बाद कैबिनेट ने इस पर अपनी मुहर भी लगा दी.इसे स्वीकृति और विधानसभा में पास होने के बाद अल्पसंख्यक समुदाय के शैक्षिक संस्थानों को एक ही जगह पर लाया जाएगा. अब तक उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम 2016 और उत्तराखंड गैर सरकारी अरबी व फारसी मदरसा अधिनियम 2019 लागू है. लेकिन इस विधेयक के पास होने के बाद यह सभी नए अधिनियम के साथ शामिल हो जाएंगे.जो की इसी साल 2026 जुलाई से लागू हो जायेगा इसके बाद उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड में जो पाठ्यक्रम पहले से चल रहे है.वो मदरसों में पढ़ाया जायेगा अन्यथा अब जो नहीं पढ़ायेगा उन मदरसों को सरकार बंद कर देगी।अब देखना होगा धामी का ये निर्णय शिक्षा के इस छेत्र में आम जनता को कितना लाभ पहुँचता है.या इस पर राजनीति आगे भी देखने को मिलेगी।