कालाष्टमी पर करें काल भैरव की विशेष पूजा, जानें शुभ मुहूर्त, भोग, पूजन विधि और महत्व

KNEWS DESK- सनातन धर्म में कालाष्टमी का व्रत अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। यह दिन भगवान शिव के उग्र और रक्षक स्वरूप भगवान काल भैरव को समर्पित होता है। हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से काल भैरव की पूजा करने से भय, संकट, नकारात्मक ऊर्जा और जीवन की परेशानियां दूर होती हैं।

ज्येष्ठ माह की कृष्ण अष्टमी पर पड़ने वाली कालाष्टमी का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन भक्त व्रत रखकर रात्रि में भगवान काल भैरव की आराधना करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

कालाष्टमी 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कालाष्टमी पर भगवान काल भैरव की पूजा निशिता काल में करना सबसे उत्तम माना जाता है। इस दौरान की गई पूजा विशेष फल प्रदान करती है।

  • निशिता काल प्रारंभ: रात 11 बजकर 56 मिनट
  • निशिता काल समाप्त: रात 12 बजकर 38 मिनट

इस शुभ समय में भक्त भगवान काल भैरव की पूजा, मंत्र जाप और आरती कर सकते हैं।

कालाष्टमी पर क्यों की जाती है काल भैरव की पूजा?

भगवान काल भैरव को समय, मृत्यु और सुरक्षा का देवता माना जाता है। मान्यता है कि वे अपने भक्तों की हर प्रकार के संकट से रक्षा करते हैं। कालाष्टमी के दिन उनकी पूजा करने से शत्रु बाधा, भय, ग्रह दोष और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है। साथ ही जीवन में सुख, शांति और आर्थिक उन्नति आती है।

काल भैरव को लगाएं ये विशेष भोग

कालाष्टमी के दिन भगवान काल भैरव को प्रिय वस्तुओं का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे भगवान शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

पूजा में आप इन चीजों का भोग लगा सकते हैं—

  • हलवा
  • खीर
  • गुलगुले या मीठे पुए
  • जलेबी
  • फल
  • चना
  • आटे और मेवे के लड्डू
  • पान और सुपारी
  • लौंग और इलायची
  • मुखवास
  • मदिरा (कुछ परंपराओं में)

काल भैरव पूजा विधि

कालाष्टमी के दिन भगवान काल भैरव की पूजा घर या मंदिर दोनों जगह की जा सकती है। घर में पूजा करते समय ईशान कोण को शुभ माना गया है।

पूजा करने की सरल विधि

  1. सबसे पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा स्थान पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान काल भैरव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  3. गंगाजल छिड़ककर स्थान को शुद्ध करें।
  4. भगवान को चंदन, पुष्प, धूप और दीप अर्पित करें।
  5. काली उड़द, फल, मिष्ठान और वस्त्र अर्पित करें।
  6. इसके बाद काल भैरव मंत्रों का जाप करें।
  7. अंत में आरती करके प्रसाद वितरित करें।

कालाष्टमी व्रत का महत्व

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार कालाष्टमी का व्रत करने से व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है और जीवन के दुखों से राहत प्राप्त होती है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है जो भय, शत्रु बाधा या आर्थिक समस्याओं से परेशान रहते हैं।भगवान काल भैरव की कृपा से भक्त के जीवन में सकारात्मकता, साहस और समृद्धि का आगमन होता है।

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