डिजिटल डेस्क- ज्योतिर्मठ पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपनी ‘गौविष्ट यात्रा’ के दौरान बलिया पहुंचे। यहाँ उन्होंने प्रसिद्ध भृगु मंदिर में महर्षि भृगु की आरती उतारी और पूजन किया। पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने अध्यात्म से लेकर राजनीति और देश के ज्वलंत मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने बलिया की धरती को नमन करते हुए यहाँ आने को पुण्य का कार्य बताया। शंकराचार्य ने बताया कि उनकी यह ‘गौविष्ट यात्रा’ गोरखपुर से शुरू हुई है। यह यात्रा उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभाओं से होकर गुजरेगी। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य जन-जागरण है। अंत में यह यात्रा पुनः गोरखपुर पहुंचेगी और वहां से लखनऊ जाकर एक भव्य कार्यक्रम के साथ इसका समापन होगा।
बंगाल हिंसा और पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल
पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद जारी हिंसा पर चिंता जताते हुए शंकराचार्य ने कहा कि लोकतंत्र में जीत और हार सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन हिंसा अस्वीकार्य है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब वहां बड़े पैमाने पर केंद्रीय बल तैनात हैं, फिर भी हिंसा क्यों नहीं रुक रही? स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, “इसके दो ही कारण हो सकते हैं या तो पुलिस में हिंसा रोकने की शक्ति नहीं है, या फिर जानबूझकर इसे होने दिया जा रहा है। यह मानना मुश्किल है कि पुलिस बल कमजोर है, इसका सीधा मतलब है कि शासन-प्रशासन की मिलीभगत से यह सब हो रहा है।”
ममता बनर्जी और उद्धव ठाकरे प्रकरण का जिक्र
ममता बनर्जी के इस्तीफे की मांग पर उन्होंने महाराष्ट्र की पूर्व उद्धव सरकार का उदाहरण दिया। शंकराचार्य ने कहा कि उद्धव ठाकरे ने नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे दिया था, जिस पर बाद में सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि यदि वे इस्तीफा न देते तो उनकी सरकार को बहाल (Restore) किया जा सकता था। इसी कानूनी पेच को देखते हुए ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं दे रही हैं और लड़ने का मन बना चुकी हैं।
हिंदू धर्म को कलंकित करने का काम कर रही है भाजपा
शंकराचार्य ने बंगाल भाजपा कार्यालय में मछली के पकवानों के आयोजन और भंडारे पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जिस तरह से इन आयोजनों को कवरेज दिया जा रहा है, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि अब यह पार्टी हिंदू धर्म की मर्यादाओं के विरुद्ध जाकर उसे कलंकित करने का काम करने लगी है। जब पत्रकारों ने उनसे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की तुलना करने को कहा, तो उन्होंने कूटनीतिक और निष्पक्ष उत्तर दिया। शंकराचार्य ने कहा, “एक संत की दृष्टि में दोनों ही बराबर हैं, हम किसी एक को दूसरे से बेहतर या कमतर नहीं आंकते।”