क्या लोकभवन में फ्लोर टेस्ट करा सकते हैं राज्यपाल? तमिलनाडु की सियासत में उठे सवालों के बीच जानें कानून…

KNEWS DESK- तमिलनाडु की राजनीति एक बार फिर संवैधानिक बहस के केंद्र में आ गई है। विधानसभा चुनावों के बाद थलापति विजय की पार्टी TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन पूर्ण बहुमत न मिलने के कारण सरकार गठन को लेकर स्थिति अब भी अनिश्चित बनी हुई है। इसी बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या राज्यपाल लोकभवन या राजभवन में फ्लोर टेस्ट करा सकते हैं?

तमिलनाडु विधानसभा की 234 सीटों में सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का बहुमत जरूरी है। चुनाव परिणामों में TVK ने 107 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस के समर्थन से उसके पास 113 विधायक हो गए। बावजूद इसके, बहुमत का आंकड़ा अभी भी 5 सीटों से दूर है।

इसी बीच TVK नेता थलापति विजय ने दो बार राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश किया, लेकिन राज्यपाल ने स्पष्ट कर दिया कि स्पष्ट बहुमत न होने पर सरकार गठन का आमंत्रण नहीं दिया जा सकता।

संवैधानिक विशेषज्ञों और सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों के अनुसार, बहुमत का अंतिम परीक्षण केवल विधानसभा के भीतर ही किया जा सकता है।

सबसे अहम फैसला S.R. Bommai vs Union of India case में आया था, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि बहुमत का निर्धारण सदन के अंदर फ्लोर टेस्ट के जरिए ही होना चाहिए, न कि राज्यपाल द्वारा राजभवन में।

इस फैसले ने राज्यपाल की भूमिका को सीमित करते हुए स्पष्ट किया कि वह खुद यह तय नहीं कर सकते कि किसके पास बहुमत है।

Rameshwar Prasad case में सुप्रीम कोर्ट ने और स्पष्ट किया कि राज्यपाल केवल प्रारंभिक जांच कर सकते हैं कि सरकार बनाने के दावेदार के पास बहुमत की संभावना है या नहीं लेकिन अंतिम निर्णय हमेशा विधानसभा में ही होता है, जहां विधायकों की वोटिंग से वास्तविक बहुमत तय किया जाता है।

2019 Maharashtra political crisis के दौरान भी राज्यपाल ने समर्थन पत्रों के आधार पर एक गुट को सरकार बनाने का मौका दिया और तुरंत फ्लोर टेस्ट का आदेश दिया था। उस समय सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट किया था कि अंतिम फैसला विधानसभा के फ्लोर टेस्ट से ही होगा।

तमिलनाडु में TVK, DMK और AIADMK की संभावित रणनीतिक चालों के बीच सियासी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। लेकिन संवैधानिक स्थिति साफ है—राज्यपाल न तो राजभवन में फ्लोर टेस्ट करा सकते हैं और न ही खुद से बहुमत तय कर सकते हैं। अंतिम निर्णय हमेशा विधानसभा के भीतर होने वाले फ्लोर टेस्ट से ही तय किया जाएगा, जो भारतीय लोकतंत्र की मूल संवैधानिक प्रक्रिया है।

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