Knews Desk– गुजरात के सूरत स्थित लाजपुर केंद्रीय जेल से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जहां 11 कैदियों ने 12वीं की परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए 100 प्रतिशत परिणाम हासिल किया है। यह उपलब्धि न केवल शिक्षा के महत्व को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि सुधार और नई शुरुआत के लिए कभी देर नहीं होती।
इन कैदियों में ऐसे भी बंदी शामिल हैं जो हत्या, हत्या के प्रयास और एनडीपीएस एक्ट जैसे गंभीर मामलों में सजा काट रहे हैं। इसके बावजूद उन्होंने शिक्षा को अपनाया और अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाया। सभी 11 कैदियों ने नियमित पढ़ाई, अनुशासन और लगातार मेहनत के दम पर यह सफलता हासिल की।

जेल प्रशासन के अनुसार, इन कैदियों को पढ़ाई के लिए जरूरी किताबें, अध्ययन सामग्री और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया गया। साथ ही उन्हें एक शांत और व्यवस्थित शैक्षणिक वातावरण भी दिया गया, जिससे वे बिना किसी बाधा के अपनी तैयारी कर सकें। इस सहयोग ने उनकी सफलता में अहम भूमिका निभाई।
परीक्षा में सफल होने वालों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे रोहित रतिराम यादव, एनडीपीएस मामले में 20 साल की सजा भुगत रहे सरफराज इकबाल पटेल और हत्या के प्रयास के मामले में बंद साहिल सुरेश पटेल जैसे कैदी भी शामिल हैं। इन सभी ने अपनी पुरानी गलतियों पर पछतावा जताते हुए एक बेहतर जीवन जीने की इच्छा व्यक्त की है। कैदियों का कहना है कि पढ़ाई ने उन्हें सोचने का नया नजरिया दिया है और अब वे समाज में सकारात्मक योगदान देना चाहते हैं। उनका मानना है कि शिक्षा ने उनके भीतर आत्मविश्वास और सुधार की भावना को मजबूत किया है।
जेल अधिकारियों ने भी इस उपलब्धि को एक बड़ा सुधारात्मक कदम बताया है। उनके अनुसार, शिक्षा और कौशल विकास कार्यक्रम कैदियों के पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इससे उनका ध्यान अपराध की दुनिया से हटकर आत्म-सुधार और जिम्मेदार जीवन की ओर जा रहा है।
इस सफलता के बाद अन्य कैदी भी पढ़ाई और स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम में रुचि दिखा रहे हैं। लाजपुर केंद्रीय जेल की यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर कोई भी व्यक्ति अपने जीवन को बदल सकता है और एक नई शुरुआत कर सकता है।