KNEWS DESK- मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। दोनों देशों के बीच जारी टकराव के बीच अब हालात खुले संघर्ष की ओर बढ़ते दिख रहे हैं, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में, जो वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है।
ताजा घटनाक्रम में आरोप है कि अमेरिका और ईरान दोनों पक्षों की ओर से समुद्री क्षेत्र में फायरिंग हुई है। इसी दौरान होर्मुज में एक बड़े हमले की खबर सामने आई, जिसमें ईरानी जहाजों पर अमेरिकी कार्रवाई का दावा किया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हमले में जहाज पर सवार 5 लोगों की मौत हो गई, हालांकि स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान को सीधी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान ने होर्मुज में अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाया तो “धरती के नक्शे से उसका नामोनिशान मिटा दिया जाएगा।” ट्रंप ने यह भी दावा किया कि “प्रोजेक्ट फ्रीडम” के तहत अमेरिकी सेना ने ईरान की सात तेज रफ्तार नौकाओं को नष्ट कर दिया है।
ट्रंप के अनुसार, ईरान ने एक दक्षिण कोरियाई कार्गो जहाज को भी निशाना बनाया, जिसके बाद उन्होंने दक्षिण कोरिया से इस अभियान में शामिल होने की बात कही। वहीं अमेरिकी पक्ष ने उस दावे को खारिज किया है जिसमें कहा गया था कि अमेरिकी नौसैनिक जहाज पर हमला हुआ है, और इसे पूरी तरह “मनगढ़ंत” बताया गया है।
इसी बीच, क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है जब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने दावा किया कि उसके कुछ ठिकानों पर ईरान की ओर से ड्रोन और रॉकेट हमले किए गए। यूएई के मुताबिक उसकी एयर डिफेंस सिस्टम ने 19 ड्रोन और मिसाइलों को रोकने की कोशिश की, लेकिन फुजैरा ऑयल इंडस्ट्री जोन में एक ड्रोन गिरने से भीषण आग लग गई। इस हमले में तीन भारतीय नागरिक घायल हुए हैं।
भारत सरकार ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए बयान जारी किया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि नागरिकों और बुनियादी ढांचे पर हमले अस्वीकार्य हैं और सभी पक्षों से तुरंत हिंसा रोकने की अपील की गई है। भारत ने होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित और निर्बाध समुद्री व्यापार की भी मांग की है और बातचीत के जरिए समाधान का समर्थन किया है।
दूसरी ओर, ईरान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि UAE पर हमलों में उसका कोई हाथ नहीं है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर कहा कि किसी भी राजनीतिक संकट का सैन्य समाधान संभव नहीं है और क्षेत्रीय शांति के लिए बातचीत ही एकमात्र रास्ता है।
इसी बीच अमेरिका ने “प्रोजेक्ट फ्रीडम” नाम से एक नया सैन्य अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट में फंसे व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित निकालना बताया जा रहा है। यह इलाका दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक है, जहां किसी भी तनाव का असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ सकता है।
हालात जिस तेजी से बिगड़ रहे हैं, उससे साफ है कि अगर कूटनीतिक प्रयासों में जल्द सफलता नहीं मिली तो मिडिल ईस्ट एक बड़े सैन्य टकराव की ओर बढ़ सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ना तय माना जा रहा है।